⚡ संक्षिप्त उत्तर — निधि श्रीमाली
वास्तु में दिशा चेक करने के लिए घर के बीच में खड़े होकर कम्पास से उत्तर निकालें और नक्शे पर आठों दिशाएँ लिख लें। फ़ोन का कम्पास लोहे और बिजली के सामान से दूर रखें और तीन जगह पढ़ाई लें। इसके बाद ही तय करें: सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व में, पढ़ते समय मुँह पूर्व या उत्तर में, और पूजा घर उत्तर-पूर्व में।
विषय सूची
- सबसे पहले दिशा ही क्यों
- कम्पास से दिशा कैसे चेक करें
- बिना कम्पास के दिशा निकालने के तरीके
- चुंबकीय उत्तर और वास्तविक उत्तर
- घर का केंद्र और आठ भाग
- डिग्री से दिशा पहचानने की तालिका
- सोने की दिशा
- घर का मुख्य द्वार किस दिशा में
- पढ़ाई की दिशा
- पूजा घर की दिशा
- एक नज़र में: कौन-सा काम किस दिशा में
- वास्तु कैसे देखें: जाँच का क्रम
- ऑनलाइन वास्तु चेक और ऐप
- वास्तु कैसे सीखें
- दिशा देखने में होने वाली गलतियाँ
- दिशा बदलने से क्या नहीं होगा
- कब जानकार से दिखवाएँ
सबसे पहले दिशा ही क्यों
वास्तु का हर नियम किसी दिशा से बँधा है। रसोई आग्नेय में, पूजा ईशान में, भारी सामान नैऋत्य में। अगर दिशा ही गलत पकड़ी गई, तो उसके बाद का पूरा हिसाब गलत हो जाता है। बिल्डर के नक्शे, पड़ोसी की बात और "सूरज उधर से निकलता है" वाले अंदाज़े, तीनों में गलती की गुंजाइश है। इसलिए कोई सामान हटाने से पहले बीस मिनट लगाकर दिशा खुद नाप लें।
कम्पास से दिशा कैसे चेक करें
साधारण चुंबकीय कम्पास या फ़ोन का कम्पास, दोनों चलते हैं। तरीका यह रखें:
- फ़ोन को कैलिब्रेट करें। कम्पास ऐप खोलकर फ़ोन को हवा में अंग्रेज़ी के 8 के आकार में कुछ बार घुमाएँ। चुंबक वाला कवर या कार-माउंट की प्लेट लगी हो तो उतार दें।
- फ़ोन को हथेली पर सपाट रखें, स्क्रीन ऊपर की ओर। तिरछा पकड़ने पर पढ़ाई बदल जाती है।
- लोहे और बिजली से दूर खड़े हों। फ़्रिज, इन्वर्टर, लोहे की अलमारी, ग्रिल, पिलर और खड़ी गाड़ी सुई को खींचते हैं। इनसे कम से कम एक-डेढ़ मीटर दूर रहें।
- तीन जगह पढ़ाई लें: मुख्य द्वार पर, घर के बीच में, और बाहर खुले में या छत पर।
- तीनों की तुलना करें। पाँच डिग्री तक का फ़र्क़ सामान्य है। फ़र्क़ ज़्यादा हो, तो खुले में ली गई पढ़ाई पर भरोसा करें, क्योंकि वहाँ सरिये और तारों का असर सबसे कम होता है।
- डिग्री लिख लें, सिर्फ़ "उत्तर" नहीं। उदाहरण: "द्वार से बाहर देखते हुए 12 डिग्री।"
मकान का मुख निकालने के लिए द्वार के अंदर खड़े होकर बाहर की ओर देखें और वही डिग्री पढ़ें। बाहर निकलते समय चेहरा जिधर है, वही घर का मुख है।
बिना कम्पास के दिशा निकालने के तरीके
नक्शे वाला ऐप: फ़ोन के मैप में सैटेलाइट दृश्य खोलें और अपनी छत ढूँढें। मैप में ऊपर की ओर उत्तर होता है, बशर्ते आपने स्क्रीन घुमाई न हो। छत की दीवारें ऊपर-नीचे की रेखा से कितनी तिरछी हैं, इससे पता चल जाता है कि प्लॉट सीधा है या कोण वाला।
सूर्योदय: सूरज ठीक पूर्व से साल में सिर्फ़ दो बार के आसपास निकलता है, मार्च और सितंबर के विषुव के दिनों में। गर्मियों में वह पूर्व से उत्तर की ओर और सर्दियों में दक्षिण की ओर खिसककर उगता है। उत्तर भारत में यह खिसकाव लगभग पच्चीस डिग्री तक पहुँच जाता है। यानी जून की सुबह देखकर तय किया गया "पूर्व" असल में पूर्व-उत्तर-पूर्व हो सकता है।
शंकु विधि: पुराने शिल्प ग्रंथों में दिशा निकालने का यही तरीका बताया गया है। समतल ज़मीन पर एक सीधी छड़ी गाड़ें और उसके चारों ओर एक गोला खींचें। सुबह जब छड़ी की छाया की नोक गोले को छुए, वहाँ निशान लगाएँ। दोपहर बाद जब नोक दोबारा गोले को छुए, दूसरा निशान लगाएँ। दोनों निशानों को जोड़ने वाली रेखा पूर्व-पश्चिम है।
चुंबकीय उत्तर और वास्तविक उत्तर
कम्पास की सुई चुंबकीय उत्तर दिखाती है, जबकि नक्शे और शंकु विधि वास्तविक (भौगोलिक) उत्तर देते हैं। दोनों के बीच के कोण को दिक्पात कहते हैं। भारत के ज़्यादातर हिस्सों में यह अंतर कुछ ही डिग्री का है, इसलिए घर के वास्तु में इससे आम तौर पर दिशा नहीं बदलती।
परेशानी तब होती है जब आपकी पढ़ाई दो दिशाओं की सीमा पर हो, जैसे 20 से 25 डिग्री के बीच। वहाँ दो-तीन डिग्री से उत्तर, उत्तर-पूर्व बन जाता है। ऐसे में फ़ोन के कम्पास की सेटिंग में "true north" चालू करके दोबारा नापें और मैप वाले तरीके से मिलाएँ।
घर का केंद्र और आठ भाग
दिशा किसी बिंदु से नापी जाती है, और वह बिंदु घर का केंद्र है, जिसे ब्रह्मस्थान कहते हैं। आयताकार या चौकोर घर में नक्शे के चारों कोनों को आमने-सामने जोड़ दें; जहाँ दोनों रेखाएँ कटती हैं, वही केंद्र है। L आकार या कटे कोने वाले घर में केंद्र निकालना कठिन है, वहाँ अंदाज़ा न लगाएँ।
अब केंद्र पर कम्पास का उत्तर मिलाकर नक्शे पर आठ बराबर भाग खींचें, हर भाग 45 डिग्री का। हर कमरे पर लिख दें कि वह किस भाग में पड़ता है। एक कमरा दो भागों में फैला हो, तो उसका बड़ा हिस्सा जिस भाग में है, वही मानें। यही एक पन्ना आगे की हर जाँच का आधार है।
फ्लैट में केंद्र आपके अपने फ्लैट का लें, पूरी इमारत का नहीं।
डिग्री से दिशा पहचानने की तालिका
| कम्पास की पढ़ाई | दिशा | दिक्पाल | परंपरा में किस काम के लिए |
|---|---|---|---|
| 337.5° से 22.5° | उत्तर | कुबेर | बैठक, तिजोरी का मुँह, खुली जगह |
| 22.5° से 67.5° | उत्तर-पूर्व (ईशान) | ईशान (शिव) | पूजा घर, पानी, खाली और हल्की जगह |
| 67.5° से 112.5° | पूर्व | इंद्र | मुख्य द्वार, खिड़कियाँ, पढ़ाई |
| 112.5° से 157.5° | दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) | अग्नि | रसोई, बिजली के उपकरण |
| 157.5° से 202.5° | दक्षिण | यम | शयनकक्ष, भंडार, भारी सामान |
| 202.5° से 247.5° | दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) | निऋति | घर के मुखिया का शयनकक्ष, सबसे भारी सामान |
| 247.5° से 292.5° | पश्चिम | वरुण | भोजन कक्ष, बच्चों का कमरा, सीढ़ी |
| 292.5° से 337.5° | उत्तर-पश्चिम (वायव्य) | वायु | मेहमानों का कमरा, अनाज का भंडार |
"किस काम के लिए" वाला खाना प्रचलित परंपरा बताता है, कोई कानून नहीं। अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में कुछ कमरों की जगह अलग बताई गई है।
सोने की दिशा
वास्तु में सोने की दिशा का मतलब है कि लेटने पर सिर किस ओर है।
- सिर दक्षिण में, पैर उत्तर में: सबसे ज़्यादा मान्य। गहरी नींद और स्थिरता से जोड़ा जाता है।
- सिर पूर्व में: विद्यार्थियों और पढ़ने-लिखने वालों के लिए अच्छा माना जाता है।
- सिर पश्चिम में: कई परंपराओं में ठीक, कुछ में मध्यम। कमरे की बनावट में दूसरा विकल्प न हो तो चल जाता है।
- सिर उत्तर में: परंपरा में टाला जाता है।
उत्तर की ओर सिर न करने के पीछे अक्सर पृथ्वी के चुंबकत्व और खून के लोहे वाली बात कही जाती है। यह व्याख्या लोकप्रिय है, पर चिकित्सा विज्ञान में इसका कोई पक्का प्रमाण मुझे नहीं पता। इसे परंपरा के रूप में मानें, वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं।
साथ में दो व्यावहारिक बातें: पलंग का सिरहाना ठोस दीवार से लगा हो, और सिर के ठीक ऊपर बीम न हो। घर के मुखिया का शयनकक्ष दक्षिण-पश्चिम में रखा जाता है। नींद हफ़्तों तक खराब रहे, तो पलंग घुमाने के भरोसे न बैठें, डॉक्टर को दिखाएँ।
घर का मुख्य द्वार किस दिशा में
परंपरा में उत्तर, पूर्व और उत्तर-पूर्व की ओर खुलने वाले द्वार सबसे पसंद किए जाते हैं, क्योंकि वहाँ से सुबह की रोशनी मिलती है। पर यह कहना कि दक्षिण या पश्चिम का द्वार अशुभ है, शास्त्र के हिसाब से ठीक नहीं। हर दीवार को आठ भागों में बाँटा जाता है और हर दीवार पर कुछ भाग द्वार के लिए अच्छे और कुछ कम अच्छे माने गए हैं।
इसलिए द्वार के लिए दो चीज़ें नापें: घर का मुख (डिग्री में) और द्वार उस दीवार के किस हिस्से में है, बीच में, या किसी कोने की ओर खिसका हुआ। उत्तर, पश्चिम और दक्षिण मुख के घरों में कौन-सा भाग अच्छा माना जाता है, यह उत्तरमुखी, पश्चिममुखी और दक्षिणमुखी मकान के वास्तु वाले लेख में तालिका के साथ दिया है।
द्वार कम अच्छे भाग में निकले, तो घबराएँ नहीं। बना हुआ दरवाज़ा तोड़ना आख़िरी उपाय है। पहले रोशनी, देहरी, सफ़ाई और कोनों के संतुलन पर काम होता है।
पढ़ाई की दिशा
पढ़ते समय मुँह पूर्व या उत्तर की ओर रखने की सलाह दी जाती है। पूर्व की ओर मुँह का अर्थ यह भी है कि सुबह की रोशनी सामने या बगल से आती है, जो आँखों के लिए आरामदेह है।
- पढ़ाई का कमरा या कोना घर के पूर्व, उत्तर, उत्तर-पूर्व या पश्चिम भाग में ठीक माना जाता है।
- कुर्सी के पीछे ठोस दीवार हो, दरवाज़ा या खिड़की नहीं। पीठ के पीछे आवाजाही से ध्यान टूटता है।
- मेज़ के ठीक ऊपर बीम या भारी अलमारी न हो।
यह सब बैठने की सुविधा है, अंकों की गारंटी नहीं। नतीजे पढ़ाई के घंटों, नींद और अच्छे मार्गदर्शन से आते हैं। बच्चे का मन लंबे समय से पढ़ाई में न लग रहा हो, तो पहले शिक्षक से बात करें और आँखों की जाँच करवाएँ।
पूजा घर की दिशा
पूजा घर के लिए उत्तर-पूर्व, यानी ईशान कोण, सबसे अच्छा माना जाता है। वहाँ जगह न हो, तो पूर्व या उत्तर दूसरा विकल्प है।
पूजा करते समय आपका मुँह पूर्व या उत्तर की ओर रहे। इसका सीधा तरीका यह है कि मूर्तियाँ या चित्र पूर्व की दीवार पर रखें, ताकि उनका मुख पश्चिम की ओर और आपका पूर्व की ओर हो।
परंपरा में इन जगहों पर पूजा घर टाला जाता है:
- शौचालय की दीवार से सटाकर, या उसके ठीक ऊपर-नीचे;
- सीढ़ियों के नीचे;
- शयनकक्ष के अंदर। छोटे फ्लैट में मजबूरी हो, तो मंदिर को कमरे के उत्तर-पूर्व कोने में रखें, पर्दा लगाएँ और पैर उस ओर करके न सोएँ।
एक नज़र में: कौन-सा काम किस दिशा में
| काम | पहली पसंद | दूसरा विकल्प | परंपरा में टालते हैं |
|---|---|---|---|
| सोते समय सिर | दक्षिण | पूर्व; कई मत में पश्चिम | उत्तर |
| पढ़ते समय मुँह | पूर्व | उत्तर | दक्षिण की ओर मुँह |
| पूजा घर की जगह | उत्तर-पूर्व | पूर्व या उत्तर | शौचालय से सटा, सीढ़ी के नीचे |
| पूजा करते समय मुँह | पूर्व | उत्तर | दक्षिण |
| मुख्य द्वार | उत्तर, पूर्व, उत्तर-पूर्व | पश्चिम या दक्षिण का शुभ भाग | दक्षिण-पश्चिम कोने के पास |
| भारी अलमारी, तिजोरी | दक्षिण-पश्चिम, मुँह उत्तर की ओर खुले | दक्षिण या पश्चिम दीवार | उत्तर-पूर्व |
रसोई की दिशा, चूल्हे और सिंक की जगह का पूरा ब्योरा रसोई वास्तु गाइड में है।
वास्तु कैसे देखें: जाँच का क्रम
दिशा नाप लेने के बाद घर का वास्तु इस क्रम में देखें। क्रम इसलिए ज़रूरी है कि ऊपर की बातें ज़्यादा भारी हैं और नीचे की हल्की।
- प्लॉट या फ्लैट का आकार: चौकोर या आयताकार है, या कोई कोना कटा या बढ़ा हुआ है।
- मुख्य द्वार: किस दीवार पर और उसके किस हिस्से में।
- उत्तर-पूर्व: खुला, हल्का और साफ़ है, या वहाँ शौचालय, सीढ़ी या कबाड़ है।
- दक्षिण-पश्चिम: भारी और बंद है, या खुला और कटा हुआ।
- रसोई और पानी: चूल्हा किस भाग में, टंकी और बोरवेल किस भाग में।
- घर का बीच: ब्रह्मस्थान खाली है, या वहाँ पिलर, शौचालय या भारी सामान है।
- बिस्तर, मेज़ और मंदिर की दिशा: यह सबसे आख़िर में, क्योंकि इसे बदलना सबसे आसान है।
हर बिंदु के आगे लिखें: ठीक, बदला जा सकता है, या ढाँचे में है। तीसरी श्रेणी की चीज़ों के लिए ही बाहरी सलाह की ज़रूरत पड़ती है। जो चीज़ें बदली जा सकती हैं, उन्हें क्रम से सुधारने का तरीका घर का वास्तु सुधारने की गाइड में है।
ऑनलाइन वास्तु चेक और ऐप
वास्तु के ऐप दो काम करते हैं। पहला, कम्पास और नक्शे पर आठ या सोलह भागों की जाली चढ़ाना। यह काम वे ठीक करते हैं और आपका समय बचाते हैं। दूसरा, घर को "वास्तु स्कोर" देना, जैसे 100 में से 62। इस अंक को गंभीरता से न लें। किसी शास्त्र में वास्तु को अंकों में तौलने का कोई सूत्र नहीं है; हर ऐप अपना हिसाब खुद बनाता है, इसलिए एक ही घर को दो ऐप अलग अंक देते हैं।
ऐप, ऑनलाइन टूल और जानकार की जाँच में क्या फ़र्क़ है, इसकी तुलना वास्तु ऑनलाइन चेक वाले लेख में है।
वास्तु कैसे सीखें
अपने घर के लायक वास्तु सीखना कठिन नहीं है। क्रम यह रखें:
- पहले दिशा नापना और नक्शे पर आठ भाग खींचना, जो ऊपर बताया गया है।
- फिर आठ दिशाओं के दिक्पाल और पंचतत्व: ईशान में जल, आग्नेय में अग्नि, नैऋत्य में पृथ्वी, वायव्य में वायु, और बीच में आकाश।
- फिर वास्तु पुरुष मंडल, यानी 81 या 64 पदों की वह जाली जिस पर द्वार और कमरों के नियम टिके हैं।
- उसके बाद अपने और रिश्तेदारों के दस-पंद्रह नक्शों पर अभ्यास।
मूल ग्रंथों में मयमत, मानसार, समरांगण सूत्रधार, विश्वकर्मा प्रकाश और बृहत् संहिता का वास्तु अध्याय प्रमुख हैं। इनके हिंदी अनुवाद मिलते हैं। वास्तु सलाहकार के लिए कोई सरकारी लाइसेंस या एक मान्य परीक्षा नहीं है, इसलिए किसी कोर्स का प्रमाणपत्र अपने-आप में योग्यता का प्रमाण नहीं होता। मूल सिद्धांत वास्तु शास्त्र की हिंदी गाइड में सरल भाषा में हैं।
दिशा देखने में होने वाली गलतियाँ
- बाहर से अंदर देखते हुए मुख बताना। मुख हमेशा अंदर से बाहर देखते हुए नापा जाता है।
- सूर्योदय को पक्का पूर्व मान लेना। गर्मी और सर्दी में सूरज अलग जगह से उगता है।
- कमरे की दिशा को घर की दिशा समझना। "कमरे का उत्तर-पूर्व कोना" और "घर का उत्तर-पूर्व भाग" अलग चीज़ें हैं। पहले घर का भाग देखें, फिर कमरे के अंदर का कोना।
- कोण वाले प्लॉट पर सीधे नियम लगाना। अगर दीवारें मुख्य दिशाओं से बीस-पच्चीस डिग्री या ज़्यादा घूमी हुई हैं, तो घर विदिशा है और उसके नियम अलग हैं।
- नाप से पहले सामान खरीद लेना। पिरामिड, दर्पण और यंत्र दिशा की गलती नहीं सुधारते।
दिशा बदलने से क्या नहीं होगा
वास्तु एक पारंपरिक पद्धति है। उसके कई नियम अच्छी रोशनी, हवा और व्यवस्था से मेल खाते हैं, और उन्हें अपनाने में कोई हर्ज नहीं। पर पलंग घुमाने, मेज़ की दिशा बदलने या मंदिर सरकाने से नौकरी, विवाह, संतान, धन या स्वास्थ्य की कोई गारंटी नहीं मिलती।
बीमारी में पहले डॉक्टर, कर्ज़ में पहले आर्थिक सलाह, और दीवार हटाने से पहले स्ट्रक्चरल इंजीनियर। वास्तु इनके साथ चल सकता है, इनकी जगह नहीं ले सकता। अगर कोई सलाहकार दिशा के नाम पर डर दिखाए या तुरंत तोड़-फोड़ कहे, तो दूसरी राय लें।
कब जानकार से दिखवाएँ
ऊपर की जाँच ज़्यादातर घरों के लिए काफ़ी है। इन हालात में किसी अनुभवी व्यक्ति को नक्शा दिखाना ठीक रहता है:
- तीनों पढ़ाइयों में फ़र्क़ बड़ा है और दिशा तय नहीं हो पा रही;
- पढ़ाई दो दिशाओं की सीमा पर है, या प्लॉट विदिशा है;
- घर L आकार का है या कोई कोना कटा है, और केंद्र नहीं निकल रहा;
- मकान खरीदने, बनवाने या बड़ी मरम्मत से पहले;
- उत्तर-पूर्व में शौचालय या दक्षिण-पश्चिम में द्वार जैसी ढाँचे की बात है और आप जानना चाहते हैं कि बिना तोड़े क्या हो सकता है।
हमारी वास्तु परामर्श सेवा में आप डिग्री लिखा हुआ नक्शा और हर कमरे की तस्वीरें भेजते हैं। उसके आधार पर सुधार प्राथमिकता के क्रम में बताए जाते हैं, और जहाँ तक हो सके बिना तोड़-फोड़ के। दूर बैठे यह जाँच कैसे होती है, यह ऑनलाइन वास्तु परामर्श वाले लेख में है। कमरे-दर-कमरे नियमों के लिए घर के लिए वास्तु शास्त्र देखें।
शुभकामनाओं सहित,
निधि श्रीमाली
मुख्य ज्योतिषी, पंडित एन.एम. श्रीमाली
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अस्वीकरण: यह लेख शैक्षिक और आध्यात्मिक जानकारी के लिए है। वास्तु के सुझाव पारंपरिक सिद्धांत हैं, निश्चित परिणाम नहीं। स्वास्थ्य, निर्माण, कानूनी और आर्थिक मामलों में योग्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
[ { "question": "वास्तु में दिशा कैसे चेक करें?", "answer": "घर के बीच में खड़े होकर कम्पास से उत्तर निकालें। फ़ोन का कम्पास पहले कैलिब्रेट करें, उसे हथेली पर सपाट रखें और फ़्रिज, अलमारी, पिलर जैसे लोहे के सामान से एक-डेढ़ मीटर दूर रहें। द्वार पर, घर के बीच में और बाहर खुले में तीन पढ़ाई लें, डिग्री लिखें और नक्शे पर आठ दिशाएँ खींच लें।" }, { "question": "वास्तु के अनुसार किस दिशा में सिर करके सोना चाहिए?", "answer": "परंपरा में सिर दक्षिण की ओर और पैर उत्तर की ओर रखकर सोना सबसे अच्छा माना जाता है। सिर पूर्व में रखना भी अच्छा माना जाता है, ख़ासकर विद्यार्थियों के लिए। उत्तर की ओर सिर करके सोना टाला जाता है। यह परंपरा है, चिकित्सा का नियम नहीं; नींद लंबे समय तक खराब रहे तो डॉक्टर को दिखाएँ।" }, { "question": "पढ़ाई किस दिशा में मुँह करके करनी चाहिए?", "answer": "पढ़ते समय मुँह पूर्व या उत्तर की ओर रखने की सलाह दी जाती है। कुर्सी के पीछे ठोस दीवार हो और मेज़ के सामने कुछ खुली जगह रहे। पढ़ाई का कमरा घर के पूर्व, उत्तर, उत्तर-पूर्व या पश्चिम भाग में ठीक माना जाता है। यह बैठने की सुविधा है, अंकों की गारंटी नहीं।" }, { "question": "पूजा घर किस दिशा में होना चाहिए?", "answer": "पूजा घर के लिए उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण सबसे अच्छा माना जाता है; वहाँ जगह न हो तो पूर्व या उत्तर। पूजा करते समय मुँह पूर्व या उत्तर की ओर रहे। शौचालय की दीवार से सटाकर, सीढ़ियों के नीचे और शयनकक्ष के अंदर पूजा घर परंपरा में टाला जाता है।" }, { "question": "घर का मुख्य द्वार किस दिशा में शुभ होता है?", "answer": "उत्तर, पूर्व और उत्तर-पूर्व की ओर खुलने वाले द्वार सबसे पसंद किए जाते हैं। दक्षिण और पश्चिम के द्वार अपने-आप में अशुभ नहीं हैं; हर दीवार पर कुछ भाग द्वार के लिए अच्छे माने गए हैं। इसलिए घर के मुख के साथ यह भी देखें कि द्वार दीवार के किस हिस्से में है।" }, { "question": "क्या फ़ोन का कम्पास वास्तु के लिए भरोसेमंद है?", "answer": "हाँ, सावधानी के साथ। फ़ोन का कम्पास लोहे, बिजली के उपकरण और चुंबक वाले कवर से भटक जाता है। कैलिब्रेट करके तीन जगह पढ़ाई लें और नक्शे वाले ऐप के सैटेलाइट दृश्य से मिला लें। तीनों में पाँच डिग्री तक का फ़र्क़ सामान्य है; ज़्यादा हो तो खुले में ली गई पढ़ाई मानें।" }, { "question": "क्या वास्तु ऐप का स्कोर सही होता है?", "answer": "ऐप का कम्पास और नक्शे पर दिशाओं की जाली काम की चीज़ें हैं, पर वास्तु स्कोर को गंभीरता से न लें। किसी शास्त्र में वास्तु को अंकों में तौलने का सूत्र नहीं है। हर ऐप अपना हिसाब खुद बनाता है, इसलिए एक ही घर को दो ऐप अलग-अलग अंक दे सकते हैं।" } ]Ready for expert guidance?
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Frequently Asked Questions
वास्तु में दिशा कैसे चेक करें?+
वास्तु के अनुसार किस दिशा में सिर करके सोना चाहिए?+
पढ़ाई किस दिशा में मुँह करके करनी चाहिए?+
पूजा घर किस दिशा में होना चाहिए?+
घर का मुख्य द्वार किस दिशा में शुभ होता है?+
क्या फ़ोन का कम्पास वास्तु के लिए भरोसेमंद है?+
क्या वास्तु ऐप का स्कोर सही होता है?+
Written by
Nidhi Shrimali
Vedic Astrologer
Nidhi Shrimali is a Vedic astrologer with 18+ years of experience specializing in Kundali Vishleshan, Kundli Milan, Vastu Shastra, and Numerology. 1,425+ Google reviews, 4.8 rating. Based in Jodhpur, Rajasthan.