⚡ संक्षिप्त उत्तर — निधि श्रीमाली
उत्तरमुखी मकान वास्तु में शुभ माना जाता है, पश्चिममुखी ठीक, और दक्षिणमुखी मकान अपने-आप में दोषपूर्ण नहीं है। तीनों में असली फ़र्क़ मुख्य द्वार की जगह से पड़ता है। दीवार को आठ बराबर भागों में बाँटकर देखें कि द्वार किस भाग में है। कोने भारी या खुले कैसे हैं, यह भी देखें। ज़्यादातर सुधार बिना तोड़-फोड़ के हो जाते हैं।
विषय सूची
- मकान का मुख कैसे पहचानें
- चारों दिशाओं के देवता और ग्रह
- उत्तरमुखी मकान: कुबेर की दिशा
- उत्तरमुखी मकान में मुख्य द्वार कहाँ हो
- उत्तरमुखी मकान की आम गलतियाँ
- पश्चिममुखी मकान: वरुण की दिशा
- पश्चिममुखी मकान का द्वार और कमरे
- दक्षिणमुखी मकान: डर कितना सही है
- दक्षिणमुखी मकान का द्वार और सुधार
- तीनों दिशाओं की तुलना
- फ्लैट में मुख कैसे तय करें
- सड़क, ढलान और वीथि शूल
- मकान खरीदने से पहले जाँच-सूची
- वास्तु क्या नहीं कर सकता
- कब सलाह लें
मकान का मुख कैसे पहचानें
मुख्य द्वार से बाहर कदम रखते समय आपका चेहरा जिस दिशा में होता है, मकान उसी दिशा का "मुखी" कहलाता है। बाहर निकलते ही सामने उत्तर दिखे तो मकान उत्तरमुखी है। बहुत लोग उल्टा मान लेते हैं और अंदर की ओर मुँह करके दिशा बताते हैं, इसलिए पहले यही पक्का कर लें।
दिशा अंदाज़े से नहीं, कम्पास से देखें। फ़ोन का कम्पास पहले कैलिब्रेट करें, फ़्रिज, लोहे की अलमारी और पिलर से दूर खड़े हों, और दरवाज़े के ठीक अंदर तथा घर के बीच में अलग-अलग पढ़ाई लें। बिल्डर के नक्शे में लिखी दिशा अक्सर दस-पंद्रह डिग्री तक गलत निकलती है।
अगर सुई ठीक उत्तर न दिखाकर बीस-तीस डिग्री तिरछी हो, तो प्लॉट विदिशा (कोण वाला) है। ऐसे प्लॉट के नियम अलग होते हैं और नीचे दी गई बातें सीधे लागू नहीं होतीं। उसे किसी जानकार से अलग से दिखवाएँ।
चारों दिशाओं के देवता और ग्रह
वास्तु में हर दिशा का एक अधिष्ठाता देवता और एक ग्रह माना गया है। इन्हीं से उस दिशा का स्वभाव समझाया जाता है:
- उत्तर: कुबेर, ग्रह बुध। धन, व्यापार और अवसर से जोड़ी जाती है।
- पूर्व: इंद्र और सूर्य। प्रकाश, मान-सम्मान और स्वास्थ्य से।
- दक्षिण: यम, ग्रह मंगल। स्थिरता, अनुशासन और बल से।
- पश्चिम: वरुण, ग्रह शनि। परिश्रम, स्थायित्व और लाभ से।
"यम की दिशा" सुनकर लोग दक्षिण से डरते हैं, जबकि यम धर्मराज हैं, न्याय और अनुशासन के देवता। यह जोड़ अपने-आप में अशुभ नहीं है। इस लेख में उत्तर, पश्चिम और दक्षिण मुख वाले घरों की बात है। पूर्वमुखी घर और पूरे घर के क्रमवार सुधार के लिए घर का वास्तु सुधारने की यह गाइड देखें।
उत्तरमुखी मकान: कुबेर की दिशा
उत्तरमुखी मकान को परंपरा में सबसे अच्छे मुखों में गिना जाता है। उत्तर से दिन भर सीधी तेज़ धूप नहीं आती, रोशनी समान रहती है, और यह दिशा कुबेर की मानी जाती है। व्यापारी परिवारों में उत्तरमुखी दुकान और घर की माँग इसी वजह से रहती है।
पर "उत्तरमुखी है, तो सब ठीक है" मान लेना गलत है। उत्तरमुखी घर का लाभ तभी मिलता है जब उत्तर की ओर का हिस्सा हल्का, खुला और साफ़ रहे। अगर उत्तर में ऊँची चारदीवारी, सीढ़ियाँ, भारी पानी की टंकी या गाड़ियों का ढेर हो, तो वही दिशा दब जाती है।
उत्तरमुखी घर में सामान्य क्रम यह रहता है: उत्तर और उत्तर-पूर्व में आँगन, लॉन या खुली जगह; दक्षिण-पश्चिम में मुख्य शयनकक्ष और भारी सामान; दक्षिण-पूर्व में रसोई। बोरवेल या भूमिगत टंकी उत्तर या उत्तर-पूर्व में, और छत की टंकी दक्षिण-पश्चिम में।
उत्तरमुखी मकान में मुख्य द्वार कहाँ हो
वास्तु पुरुष मंडल में घर की हर दीवार पर आठ देवताओं के पद माने गए हैं, यानी चारों ओर कुल 32 पद। आजकल प्रचलित पद्धति में उत्तर की दीवार को उत्तर-पश्चिम कोने से उत्तर-पूर्व की ओर आठ बराबर भागों में बाँटते हैं:
- रोग
- नाग
- मुख्य
- भल्लाट
- सोम (कुबेर)
- भुजग
- अदिति
- दिति
इस पद्धति में तीसरा, चौथा और पाँचवाँ भाग (मुख्य, भल्लाट, सोम) द्वार के लिए सबसे शुभ माने जाते हैं। उत्तर-पश्चिम कोने के पास के पहले दो भाग टाले जाते हैं। बाकी भागों पर अलग-अलग आचार्यों के मत अलग हैं।
दो बातें साथ में याद रखें। पहली, अलग ग्रंथों और परंपराओं में पदों की गिनती की दिशा और नाम में थोड़ा फ़र्क़ है, इसलिए यह हिसाब नक्शे पर लगाकर किसी जानकार से मिलवा लें। दूसरी, बना हुआ अच्छा दरवाज़ा सिर्फ़ इस हिसाब के कारण तोड़ना ठीक नहीं। द्वार कम शुभ भाग में हो तो पहले रोशनी, सफ़ाई, देहरी और आसपास के कोनों पर काम करें।
उत्तरमुखी मकान की आम गलतियाँ
उत्तरमुखी घरों में ये गलतियाँ बार-बार दिखती हैं:
- उत्तर में गाड़ी खड़ी करना और कबाड़ जमा करना। सामने की जगह होने से पार्किंग वहीं बन जाती है। गाड़ी खड़ी हो सकती है, पर द्वार के ठीक सामने रास्ता खुला रहे और पुराने टायर, गमलों का ढेर, टूटा सामान न हो।
- उत्तर की चारदीवारी दक्षिण से ऊँची होना। परंपरा में दक्षिण और पश्चिम की दीवार ऊँची और मोटी, उत्तर और पूर्व की नीची रखी जाती है।
- उत्तर-पूर्व में सीढ़ी या शौचालय। यह कोना हल्का और पवित्र रखा जाता है। शौचालय वहाँ पहले से हो तो उसे साफ़, सूखा और बंद रखें; तोड़ने से पहले सलाह लें।
- द्वार पर जूते-चप्पलों का ढेर और कूड़ेदान। यह किसी भी मुख के घर में ठीक नहीं, पर उत्तरमुखी घर में यही सबसे आम दिखता है।
पश्चिममुखी मकान: वरुण की दिशा
पश्चिममुखी मकान को वास्तु में सामान्य रूप से ठीक माना जाता है। पश्चिम वरुण की दिशा है और ग्रह शनि का, जो मेहनत से स्थायी लाभ से जोड़ा जाता है। कई परिवार पश्चिममुखी घरों में पीढ़ियों से अच्छे से रह रहे हैं।
पश्चिममुखी घर की असली चुनौती व्यावहारिक है: दोपहर बाद की तेज़ धूप सीधे सामने के कमरों में आती है। राजस्थान जैसे गर्म इलाकों में यह गर्मियों में साफ़ महसूस होता है। इसलिए पारंपरिक घरों में पश्चिम की ओर बरामदा, छज्जा, जाली या घने पेड़ रखे जाते थे। वास्तु का "पश्चिम भारी रखें" वाला नियम यहाँ ठंडक का काम भी करता है।
पश्चिममुखी घर में भी उत्तर-पूर्व खुला और दक्षिण-पश्चिम भारी रखने का नियम वैसा ही रहता है। सामने की खुली जगह पश्चिम में होने के बावजूद पीछे की ओर, यानी पूर्व और उत्तर-पूर्व में, कुछ खुलापन ज़रूर छोड़ें।
पश्चिममुखी मकान का द्वार और कमरे
प्रचलित पद्धति में पश्चिम की दीवार को दक्षिण-पश्चिम कोने से उत्तर-पश्चिम की ओर आठ भागों में बाँटा जाता है। इनमें तीसरा और चौथा भाग (सुग्रीव, पुष्पदंत) द्वार के लिए अच्छे माने जाते हैं, और कई आचार्य पाँचवें (वरुण) को भी स्वीकार करते हैं। दक्षिण-पश्चिम कोने के बिल्कुल पास द्वार टाला जाता है।
पश्चिममुखी घर में कमरों के बारे में कुछ व्यावहारिक बातें:
- सामने का बैठक कक्ष पश्चिम में आए तो भारी पर्दे या जाली से दोपहर की धूप रोकें।
- बच्चों का पढ़ाई का कमरा पश्चिम में अक्सर ठीक रहता है, बशर्ते पढ़ते समय मुँह पूर्व या उत्तर की ओर हो।
- सीढ़ी के लिए पश्चिम और दक्षिण उपयुक्त माने जाते हैं, इसलिए पश्चिममुखी घर में सीढ़ी सामने की ओर रखना अक्सर आसान पड़ता है।
- रसोई दक्षिण-पूर्व में ही रहे, भले सामने का हिस्सा पश्चिम में हो। रसोई के विस्तार के लिए रसोई वास्तु गाइड देखें।
दक्षिणमुखी मकान: डर कितना सही है
दक्षिणमुखी मकान को लेकर सबसे ज़्यादा डर फैला है। लोग सस्ता मिलने पर भी उसे छोड़ देते हैं, या खरीदने के बाद हर परेशानी का कारण उसी को मान लेते हैं।
शास्त्र दक्षिणमुखी घर को केवल मुख के आधार पर दोषी नहीं ठहराते। हर दिशा की दीवार पर शुभ और अशुभ दोनों पद हैं, और दक्षिण भी इससे अलग नहीं। दक्षिणमुखी घर का द्वार सही भाग में हो और दक्षिण-पश्चिम भारी और बंद रहे, तो उसे खराब घर कहने का कोई आधार नहीं।
दक्षिणमुखी घर के कुछ व्यावहारिक फ़ायदे भी हैं। आगे की खुली जगह दक्षिण में होने से पीछे उत्तर और पूर्व में आँगन, बगीचा और खिड़कियाँ आसानी से निकल आती हैं। वास्तु जिस खुलेपन की बात करता है, वह इन्हीं दिशाओं में चाहिए।
ज्योतिष में भी यही सावधानी काम की है। किसी परिवार की परेशानी को केवल घर के मुख से जोड़ना जल्दबाज़ी है। उसके पीछे कुंडली की दशा, स्वास्थ्य, आर्थिक कारण, कुछ भी हो सकता है।
दक्षिणमुखी मकान का द्वार और सुधार
प्रचलित पद्धति में दक्षिण की दीवार को दक्षिण-पूर्व कोने से दक्षिण-पश्चिम की ओर आठ भागों में बाँटते हैं। तीसरा और चौथा भाग (वितथ, गृहक्षत) द्वार के लिए शुभ माने जाते हैं। पाँचवाँ भाग (यम) और उसके बाद दक्षिण-पश्चिम की ओर के भाग टाले जाते हैं। दक्षिणमुखी घर में सबसे ज़्यादा ध्यान इसी पर दें कि द्वार दक्षिण-पश्चिम की ओर न खिसका हो।
द्वार कम शुभ भाग में है, तो तोड़-फोड़ से पहले ये सुधार आज़माएँ:
- द्वार पर पक्की देहरी (दहलीज़) रखें और दरवाज़ा मज़बूत, भारी लकड़ी का हो।
- द्वार के आसपास रोशनी अच्छी रहे; शाम को बत्ती जलाकर रखें।
- दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम की चारदीवारी ऊँची और मज़बूत हो; इस ओर ऊँचे पेड़ लगाए जा सकते हैं।
- दक्षिण-पश्चिम में खिड़कियाँ कम और छोटी, भारी फ़र्नीचर और अलमारी वहीं।
- कई परिवार परंपरा से दक्षिणमुखी द्वार पर हनुमान जी का चित्र या वास्तु यंत्र लगाते हैं। इसे आस्था का प्रतीक मानें, ढाँचे का सुधार नहीं; ऊपर के व्यावहारिक कदम पहले।
तीनों दिशाओं की तुलना
| मुख | देवता / ग्रह | प्रचलित शुभ द्वार भाग | सबसे पहले क्या देखें | बिना तोड़-फोड़ के सुधार |
|---|---|---|---|---|
| उत्तर | कुबेर / बुध | उत्तर-पश्चिम कोने से 3, 4, 5 (मुख्य, भल्लाट, सोम) | उत्तर का हिस्सा खुला और हल्का है या नहीं | पार्किंग और कबाड़ हटाना, उत्तर की दीवार नीची रखना |
| पश्चिम | वरुण / शनि | दक्षिण-पश्चिम कोने से 3, 4 (सुग्रीव, पुष्पदंत); कई मत में 5 (वरुण) | दोपहर की धूप और पूर्व में खुलापन | छज्जा, जाली, पेड़; पूर्व-उत्तर में खुली जगह |
| दक्षिण | यम / मंगल | दक्षिण-पूर्व कोने से 3, 4 (वितथ, गृहक्षत) | द्वार दक्षिण-पश्चिम की ओर तो नहीं | देहरी, मज़बूत दरवाज़ा, ऊँची दक्षिण दीवार, रोशनी |
पदों की गिनती अलग परंपराओं में थोड़ी अलग है; यह तालिका आज प्रचलित पद्धति पर आधारित है, अंतिम निर्णय नहीं।
फ्लैट में मुख कैसे तय करें
अपार्टमेंट में यह सवाल उलझन वाला है, क्योंकि इमारत का गेट एक दिशा में होता है और आपके फ्लैट का दरवाज़ा गलियारे में किसी और दिशा में।
आज ज़्यादातर वास्तु सलाहकार फ्लैट के अपने मुख्य दरवाज़े की दिशा को मुख मानते हैं, क्योंकि आपके घर की ऊर्जा का प्रवेश वहीं से है। कुछ लोग बालकनी या सबसे बड़ी खिड़की की दिशा को देखते हैं। दोनों मत चलते हैं; व्यवहार में फ्लैट के दरवाज़े से ही चलना आसान और सुसंगत है।
फ्लैट में दीवारें नहीं बदली जा सकतीं, इसलिए वहाँ कमरों का उपयोग, बिस्तर की दिशा, भारी सामान की जगह और उत्तर-पूर्व की सफ़ाई ही असली साधन हैं। दिशाओं और पंचतत्व के मूल सिद्धांत वास्तु शास्त्र की हिंदी गाइड में हैं।
सड़क, ढलान और वीथि शूल
मुख के साथ तीन बातें और देखी जाती हैं:
ढलान: ज़मीन और छत का पानी उत्तर या पूर्व की ओर बहे, यह परंपरा में शुभ माना जाता है। दक्षिणमुखी प्लॉट में सड़क दक्षिण में होने से अक्सर ढलान सड़क की ओर, यानी दक्षिण में बन जाता है। फ़र्श और नाली की ढलान अंदर से उत्तर-पूर्व की ओर रखवाना आसान सुधार है।
वीथि शूल: जब कोई सड़क सीधे आकर आपके प्लॉट पर ख़त्म होती है (T-पॉइंट), उसे वीथि शूल कहते हैं। परंपरा में उत्तर-पूर्व की ओर से आने वाला वीथि शूल अच्छा, और दक्षिण-पश्चिम की ओर से आने वाला सबसे भारी माना जाता है। खरीदने से पहले यह ज़रूर देखें, क्योंकि इसे बाद में बदला नहीं जा सकता।
दो ओर सड़क: कोने के प्लॉट में दो मुख होते हैं। उत्तर-पूर्व कोने का प्लॉट (उत्तर और पूर्व दोनों ओर सड़क) सबसे पसंद किया जाता है।
मकान खरीदने से पहले जाँच-सूची
- कम्पास से असली मुख देखें; नक्शे पर भरोसा न करें।
- मुख्य दीवार को आठ भागों में बाँटकर देखें कि द्वार किस भाग में है।
- उत्तर-पूर्व कोना खुला है या वहाँ शौचालय, सीढ़ी या रसोई है।
- दक्षिण-पश्चिम कोना भारी और बंद है या कटा हुआ और खुला।
- सामने कोई वीथि शूल, बड़ा खंभा, पेड़ या ट्रांसफ़ॉर्मर द्वार को रोक तो नहीं रहा।
- पानी की ढलान किधर है।
- प्लॉट विदिशा तो नहीं; हो तो अलग से जाँच करवाएँ।
इनमें से जो बातें बाद में बदली नहीं जा सकतीं (वीथि शूल, कटा कोना, विदिशा), उन्हें खरीदने से पहले तौलें। जो बदली जा सकती हैं (रसोई का सामान, बिस्तर, रंग), उनके लिए अच्छा घर छोड़ना ठीक नहीं। घर के अलग-अलग कमरों के नियम घर के लिए वास्तु शास्त्र में विस्तार से हैं।
वास्तु क्या नहीं कर सकता
वास्तु एक पारंपरिक पद्धति है, और इसके कई नियम अच्छे डिज़ाइन से मेल खाते हैं: रोशनी, हवा, धूप से बचाव, पानी की निकासी। इसका मान रखना ठीक है। पर कोई मुख, कोई द्वार और कोई यंत्र धन, विवाह, संतान या स्वास्थ्य की गारंटी नहीं देता।
घर में किसी को बार-बार बीमारी हो, तो पहले डॉक्टर को दिखाएँ; वास्तु का सुधार साथ में हो सकता है, इलाज की जगह नहीं। दीवार हटाने या द्वार बदलने से पहले स्ट्रक्चरल इंजीनियर से पूछें, ख़ासकर फ्लैट में, जहाँ एक दीवार पूरी इमारत का भार उठा सकती है। पैसे की तंगी हो तो पहले आर्थिक योजना देखें, फिर वास्तु।
कब सलाह लें
सामान्य नियम ऊपर हैं। किसी जानकार से घर दिखवाना तब ठीक रहता है जब:
- आप मकान या प्लॉट खरीदने जा रहे हैं और बयाना देने से पहले पक्का करना चाहते हैं;
- द्वार कम शुभ भाग में है और आप जानना चाहते हैं कि तोड़-फोड़ ज़रूरी है या नहीं (अक्सर नहीं होती);
- प्लॉट विदिशा है या उसका आकार अनियमित है;
- नया घर बनवा रहे हैं और नक्शा अभी बदला जा सकता है।
हमारी वास्तु परामर्श सेवा में आप दिशा लिखा हुआ नक्शा और द्वार की तस्वीरें भेजते हैं। उसके आधार पर प्राथमिकता के क्रम में सुधार बताए जाते हैं, ज़्यादातर बिना तोड़-फोड़ के। फ़ोन पर दूर से वास्तु जाँच कैसे होती है, यह ऑनलाइन वास्तु परामर्श वाले लेख में है।
शुभकामनाओं सहित,
निधि श्रीमाली
मुख्य ज्योतिषी, पंडित एन.एम. श्रीमाली
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अस्वीकरण: यह लेख शैक्षिक और आध्यात्मिक जानकारी के लिए है। वास्तु के सुझाव पारंपरिक सिद्धांत हैं, निश्चित परिणाम नहीं। स्वास्थ्य, निर्माण, कानूनी और आर्थिक मामलों में योग्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
[ { "question": "क्या उत्तरमुखी मकान वास्तु में शुभ होता है?", "answer": "हाँ, परंपरा में उत्तरमुखी मकान अच्छे मुखों में गिना जाता है, क्योंकि उत्तर कुबेर की दिशा मानी जाती है और वहाँ से रोशनी समान रहती है। पर लाभ तभी है जब उत्तर का हिस्सा खुला और हल्का रहे और मुख्य द्वार शुभ भाग में हो।" }, { "question": "उत्तरमुखी मकान में मुख्य द्वार किस भाग में होना चाहिए?", "answer": "प्रचलित पद्धति में उत्तर की दीवार को उत्तर-पश्चिम कोने से उत्तर-पूर्व की ओर आठ बराबर भागों में बाँटते हैं। तीसरा, चौथा और पाँचवाँ भाग (मुख्य, भल्लाट, सोम) सबसे शुभ माने जाते हैं। अलग परंपराओं में गिनती थोड़ी अलग है, इसलिए नक्शे पर जानकार से मिलान करवाएँ।" }, { "question": "क्या दक्षिणमुखी मकान अशुभ होता है?", "answer": "नहीं, केवल मुख के कारण नहीं। हर दिशा की दीवार पर शुभ और अशुभ दोनों पद हैं। दक्षिणमुखी घर में द्वार दक्षिण-पूर्व कोने से तीसरे या चौथे भाग में हो और दक्षिण-पश्चिम भारी और बंद रहे, तो उसे खराब घर कहने का आधार नहीं है।" }, { "question": "पश्चिममुखी मकान का वास्तु कैसा होता है?", "answer": "पश्चिममुखी मकान को सामान्य रूप से ठीक माना जाता है। इसकी मुख्य चुनौती दोपहर बाद की तेज़ धूप है, इसलिए पश्चिम में छज्जा, जाली या पेड़ रखें। द्वार दक्षिण-पश्चिम कोने से तीसरे या चौथे भाग में अच्छा माना जाता है, और पूर्व-उत्तर में कुछ खुली जगह ज़रूर छोड़ें।" }, { "question": "फ्लैट का मुख कैसे तय करें?", "answer": "ज़्यादातर वास्तु सलाहकार फ्लैट के अपने मुख्य दरवाज़े की दिशा को मुख मानते हैं, इमारत के गेट को नहीं। कुछ लोग बालकनी की दिशा भी देखते हैं। फ्लैट में दीवारें नहीं बदलतीं, इसलिए कमरों का उपयोग, भारी सामान की जगह और उत्तर-पूर्व की सफ़ाई ही मुख्य सुधार हैं।" }, { "question": "क्या गलत भाग में बना दरवाज़ा तोड़ना ज़रूरी है?", "answer": "ज़्यादातर मामलों में नहीं। पहले देहरी, मज़बूत दरवाज़ा, अच्छी रोशनी, सफ़ाई और कोनों का संतुलन ठीक करें। दरवाज़ा बदलना हो तो पहले स्ट्रक्चरल इंजीनियर से पूछें, ख़ासकर फ्लैट में। अच्छे घर को केवल इस हिसाब के कारण तोड़ना उचित नहीं।" }, { "question": "वीथि शूल क्या होता है?", "answer": "जब कोई सड़क सीधे आकर आपके प्लॉट पर ख़त्म हो (T-पॉइंट), उसे वीथि शूल कहते हैं। परंपरा में उत्तर-पूर्व की ओर से आने वाला वीथि शूल अच्छा और दक्षिण-पश्चिम की ओर से आने वाला सबसे भारी माना जाता है। इसे बाद में बदला नहीं जा सकता, इसलिए खरीदने से पहले देखें।" } ]Ready for expert guidance?
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Frequently Asked Questions
क्या उत्तरमुखी मकान वास्तु में शुभ होता है?+
उत्तरमुखी मकान में मुख्य द्वार किस भाग में होना चाहिए?+
क्या दक्षिणमुखी मकान अशुभ होता है?+
पश्चिममुखी मकान का वास्तु कैसा होता है?+
फ्लैट का मुख कैसे तय करें?+
क्या गलत भाग में बना दरवाज़ा तोड़ना ज़रूरी है?+
वीथि शूल क्या होता है?+
Written by
Nidhi Shrimali
Vedic Astrologer
Nidhi Shrimali is a Vedic astrologer with 18+ years of experience specializing in Kundali Vishleshan, Kundli Milan, Vastu Shastra, and Numerology. 1,425+ Google reviews, 4.8 rating. Based in Jodhpur, Rajasthan.