नवरात्रि में क्यों करते हैं कलश स्थापना? गुरु माँ निधि जी से जानिए कलश का शुभ महत्व
विषय सूची (Table of Contents)
- कलश में समाहित है संपूर्ण सृष्टि का भाव
- नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व
- कलश और भगवान वरुण का संबंध
- कलश हमें क्या सिखाता है?we perform Kalash Sthapana during Navratri
- नवचंडी पूजा में कलश स्थापना का विशेष स्थान
- घर में कलश स्थापना क्यों शुभ मानी जाती है?
- इस नवरात्रि माँ के चरणों में अपना संकल्प रखें
नमस्ते साधकों एवं श्रद्धालुओं!
नवरात्रि आते ही हमारे घरों और मंदिरों में एक विशेष आध्यात्मिक वातावरण बन जाता है। माँ दुर्गा की आराधना, मंत्र-जाप, दीप प्रज्वलन और हवन के साथ नवरात्रि के प्रथम दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर नवरात्रि में कलश की स्थापना क्यों की जाती है? कलश में ऐसा क्या विशेष है कि किसी भी शुभ धार्मिक अनुष्ठान में उसे इतना महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है? we perform Kalash Sthapana during Navratri
अपने आध्यात्मिक ज्ञान और वर्षों के अनुभव के आधार पर गुरु माँ निधि जी बताती हैं कि कलश केवल मिट्टी या धातु का एक पात्र और उसमें भरा हुआ जल नहीं है। जब उसे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ स्थापित किया जाता है, तो वह हमारे लिए देव शक्तियों, मंगल, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का पवित्र प्रतीक बन जाता है।
कलश में समाहित है संपूर्ण सृष्टि का भाव
सनातन परंपरा में कलश को अत्यंत पवित्र माना गया है। कलश के पूजन के समय उच्चारित किए जाने वाले मंत्रों में उसके भीतर विभिन्न देवी-देवताओं, वेदों, तीर्थों, नदियों और समुद्रों की दिव्य उपस्थिति का भाव किया जाता है।
प्रसिद्ध कलश मंत्र में कहा गया है—
“कलशस्य मुखे विष्णुः कंठे रुद्रः समाश्रितः।
मूले तत्र स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः॥”
अर्थात कलश के मुख में भगवान विष्णु, कंठ में भगवान रुद्र और मूल भाग में ब्रह्मा का निवास माना गया है।
आगे कलश में समुद्रों, पृथ्वी, वेदों और अन्य दिव्य शक्तियों की उपस्थिति का स्मरण किया जाता है।we perform Kalash Sthapana during Navratri
गुरु माँ निधि जी के अनुसार, हमारे ऋषि-मुनियों ने एक छोटे से कलश में सम्पूर्ण ब्रह्मांड की व्यापकता का भाव देखने की अद्भुत परंपरा दी है।
यही सनातन संस्कृति की विशेषता है—जहाँ एक छोटे से प्रतीक में भी विराट का दर्शन कराया जाता है।
नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व
नवरात्रि माँ दुर्गा की आराधना और शक्ति जागरण का पर्व है। इसलिए नवरात्रि के प्रथम दिन कलश की स्थापना करके हम उस स्थान को माँ की साधना के लिए पवित्र और ऊर्जावान बनाने का संकल्प लेते हैं।
कलश में जल भरकर, उसके ऊपर आम या अशोक के पत्ते और श्रीफल स्थापित किया जाता है। स्वस्तिक जैसे मंगल चिह्न बनाए जाते हैं और विधि-विधान से कलश का पूजन किया जाता है।Navrati
गुरु माँ निधि जी बताती हैं कि यह केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं है। हर एक सामग्री के पीछे एक आध्यात्मिक भाव जुड़ा हुआ है।
जल जीवन का प्रतीक है।we perform Kalash Sthapana during Navratri
पत्ते नवजीवन और सकारात्मकता का संदेश देते हैं।
श्रीफल पूर्णता और मंगल का प्रतीक माना जाता है।
स्वस्तिक शुभता और कल्याण का प्रतीक है।
जब इन सभी को श्रद्धा और मंत्रों के साथ एक साथ स्थापित किया जाता है, तो साधना स्थल पर एक पवित्र वातावरण निर्मित होता है।
कलश और भगवान वरुण का संबंध
सनातन परंपरा में जल को अत्यंत पवित्र माना गया है और कलश का संबंध भगवान वरुण से भी जोड़ा जाता है।
साधना और पूजा के दौरान कलश में स्थापित जल को सामान्य जल के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि मंत्रों और संकल्प के माध्यम से उसमें दिव्यता का भाव स्थापित किया जाता है।
गुरु माँ निधि जी कहती हैं कि जल केवल शरीर की आवश्यकता नहीं है, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में यह जीवन, शुद्धि और ऊर्जा का भी प्रतीक है।
इसीलिए पूजा के बाद कलश के जल को पवित्र मानकर उसका उपयोग किया जाता है और उससे जुड़े मंत्रों में शांति, आरोग्य और रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
कलश हमें क्या सिखाता है?we perform Kalash Sthapana during Navratri
गुरु माँ निधि जी के अनुसार, कलश हमें जीवन का एक बहुत सुंदर संदेश भी देता है।
कलश बाहर से सीमित दिखाई देता है, लेकिन उसके भीतर जल जीवन को धारण करता है। उसी प्रकार मनुष्य भी बाहर से छोटा दिखाई दे सकता है, लेकिन उसके भीतर असीम संभावनाएँ और दिव्य शक्ति छिपी होती है।
जब मनुष्य अपने जीवन को अच्छे विचारों, संस्कारों, ज्ञान और सेवा से भरता है, तब उसका जीवन भी एक पवित्र कलश की तरह बन जाता है।
इसलिए कलश केवल पूजा की वस्तु नहीं, बल्कि यह संदेश है कि अपने भीतर हमेशा शुभ विचारों और सकारात्मक ऊर्जा को स्थान दें।
नवचंडी पूजा में कलश स्थापना का विशेष स्थान
हर वर्ष की तरह इस नवरात्रि में भी गुरु माँ निधि जी के संस्थान में विधि-विधान और श्रद्धा के साथ नवचंडी पूजा एवं हवन का आयोजन किया जाएगा।
इस पावन अनुष्ठान में नवरात्रि के प्रथम दिन शास्त्रसम्मत विधि से कलश स्थापना की जाएगी।
माँ दुर्गा की आराधना, मंत्रोच्चार, कलश पूजन और हवन के माध्यम से माँ की कृपा एवं आशीर्वाद की प्रार्थना की जाएगी।
गुरु माँ निधि जी का भाव है कि इस पावन पूजा से जो भी श्रद्धालु जुड़ें, उनके जीवन में माँ दुर्गा की कृपा बनी रहे, उनके परिवार में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो तथा सभी पर माँ का आशीर्वाद बना रहे।
यह पूजा केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रद्धा, संकल्प और माँ के चरणों में अपनी भावनाएँ समर्पित करने का अवसर है।
घर में कलश स्थापना क्यों शुभ मानी जाती है?
हमारे यहाँ किसी नए घर में प्रवेश के समय भी जल से भरे कलश का विशेष महत्व होता है। इसका भाव यही है कि जिस घर में प्रवेश किया जा रहा है, वह घर हमेशा जल से भरे कलश की तरह समृद्ध, पवित्र, शांत और नवजीवन से परिपूर्ण रहे।
कलश के ऊपर श्रीफल रखने की परंपरा भी इसी मंगल भावना को दर्शाती है।
गुरु माँ निधि जी कहती हैं कि शुभ अवसरों पर कलश की उपस्थिति हमें यह याद दिलाती है कि किसी भी नए कार्य की शुरुआत केवल बाहरी तैयारी से नहीं, बल्कि शुभ संकल्प और ईश्वर के स्मरण से होनी चाहिए।
इस नवरात्रि माँ के चरणों में अपना संकल्प रखें
नवरात्रि हमें अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन करने का अवसर देती है।
आइए, इस नवरात्रि माँ दुर्गा की आराधना के साथ अपने भीतर भी एक पवित्र कलश स्थापित करें—जिसमें प्रेम हो, श्रद्धा हो, सेवा हो, सकारात्मक विचार हों और ईश्वर के प्रति विश्वास हो।
माँ दुर्गा की कृपा से हमारे जीवन का हर अंधकार दूर हो और हमारे घर-परिवार में सुख, शांति, समृद्धि एवं सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।
गुरु माँ निधि जी के संस्थान की नवचंडी पूजा से जुड़ें
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी गुरु माँ निधि जी के संस्थान में नवचंडी पूजा, हवन एवं विधि-विधान से कलश स्थापना का पावन आयोजन किया जा रहा है।
आप भी इस दिव्य आयोजन से जुड़कर माँ दुर्गा की आराधना में सहभागी बनें और अपने परिवार के लिए माँ का आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना करें।
अधिक से अधिक श्रद्धालु इस पावन पूजा से जुड़ें और माँ दुर्गा की आराधना एवं नवचंडी पूजा को सफल बनाने में अपना योगदान दें।
🙏 जय माता दी! 🙏
पूजा से जुड़ने के लिए संपर्क करें:
📞 9929391753
गुरु माँ निधि जी का संस्थान — जोधपुर
माँ दुर्गा सभी भक्तों पर अपनी कृपा एवं आशीर्वाद बनाए रखें।
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Written by
Nidhi Shrimali
Vedic Astrologer
Nidhi Shrimali is a Vedic astrologer with 18+ years of experience specializing in Kundali Vishleshan, Kundli Milan, Vastu Shastra, and Numerology. 1,425+ Google reviews, 4.8 rating. Based in Jodhpur, Rajasthan.