✨ लेखिका परिचय: यह लेख गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली जी द्वारा 15 वर्षों के व्यावहारिक ज्योतिष अनुभव के आधार पर लिखा गया है। उनके पास 50,000+ सफल केस स्टडीज हैं और वे पंडित एनएम श्रीमाली की प्रमुख ज्योतिषी हैं।
विषय सूची (Table of Contents)
- मेरा व्यक्तिगत अनुभव — मंगल ग्रह और साहस की शक्ति
- मंगल ग्रह का परिचय — देवता, मिथक और महत्व
- खगोलीय और ज्योतिषीय विशेषताएं
- मंगल का शरीर पर प्रभाव
- कुंडली में मंगल की स्थिति का महत्व
- अनुकूल और प्रतिकूल राशियां
- मंगल का कारकत्व
- मंगल की दशा और गोचर का प्रभाव
- कमजोर और बलवान मंगल की पहचान
- मंगल मजबूत करने के 11 शक्तिशाली उपाय
- मंगल मंत्र और पूजा विधि
- मंगल रत्न और धातु
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- निष्कर्ष — मेरी अंतिम सलाह
मेरा व्यक्तिगत अनुभव — मंगल ग्रह और साहस की शक्ति
नमस्ते, मैं निधि श्रीमाली हूं। पिछले 15 वर्षों में मैंने देखा है कि मंगल ग्रह जातक के साहस, पराक्रम, भाई-बहनों, भूमि, संपत्ति और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। मंगल बलवान हो तो जातक निडर, ऊर्जावान और सफल होता है। कमजोर हो तो क्रोध, दुर्घटना, भूमि विवाद और वैवाहिक समस्याएं आती हैं।
केस स्टडी: 2024 में मेरे पास उदयपुर का एक 35 वर्षीय व्यक्ति आया। कह रहे थे कि 2 बार दुर्घटना हो चुकी है, व्यापार में बहुत विलंब हो रहा है, भाई से अनबन है, और संपत्ति का विवाद चल रहा है। कुंडली देखी तो मंगल वृश्चिक राशि में 8वें भाव में शनि के साथ था — अंगारक योग बन रहा था। मैंने मंगलवार व्रत, हनुमान जी की पूजा, मूंगा रत्न धारण करने की सलाह दी। 4 महीने के भीतर संपत्ति विवाद सुलझा, व्यापार में स्थिरता आई, और क्रोध पर नियंत्रण हुआ। मंगल उपायों का सशक्त प्रभाव है।
💡 मेरा वादा: हर बात, हर उपाय, हर टिप वही है जो मैंने अपने 15 वर्षों के क्लिनिकल अनुभव में सीखा है।
मंगल ग्रह का परिचय
मंगल हिंदू ज्योतिष का एक महत्वपूर्ण ग्रह है। यह सौरमंडल का चौथा ग्रह है और पृथ्वी के सबसे निकट है। मंगल को भौम, लोहित, कुज, अंगारक, वक्र आदि नामों से जाना जाता है।
मंगल देव की मिथक कथा:
प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, मंगल देव की उत्पत्ति पृथ्वी के गर्भ से हुई। इसीलिए मंगल को "भूमिपुत्र" या "भौम" भी कहते हैं। एक कथा के अनुसार, जब शिव जी का मदकिनी नदी में मद बहकर आया और पृथ्वी पर गिरा, तब उस मद से मंगल देव की उत्पत्ति हुई। मंगल देव की पत्नी मेषी (मंगल की बहन भी) से विवाह हुआ। मंगलवती मंगल देव की पुत्री है।
मंगल का प्रतीक और तत्व:
- रंग: लाल, केसरिया
- धातु: तांबा, लोहा
- रत्न: मूंगा (Red Coral)
- दिन: मंगलवार
- दिशा: दक्षिण
- तत्व: अग्नि
- देवता: मंगल देव, हनुमान जी, कार्तिकेय
- संख्या: 9
- मंत्र: ॐ भौमाय नमः
खगोलीय और ज्योतिषीय विशेषताएं
मंगल सौरमंडल का चौथा ग्रह है जिसे "लाल ग्रह" या "रेड प्लैनेट" कहते हैं। इसकी सतह लाल है क्योंकि यह आयरन ऑक्साइड से भरी है।
प्रमुख ज्योतिषीय तथ्य:
- भ्रमण काल: लगभग 1 वर्ष 10 महीने (687 दिन)
- राशि परिवर्तन: लगभग 45 दिन प्रति राशि
- उच्च राशि: मकर (27° तक)
- नीच राशि: कर्क (28° तक)
- मूलत्रिकोण: मेष, सिंह (कुछ विद्वान मानते हैं)
- स्वराशि: मेष, वृश्चिक
- सम राशि: सिंह
- उच्च नवांश: कुंभ
- नीच नवांश: सिंह
मंगल के गण:
- रजस गण (राजसिक प्रकृति)
- पाप ग्रह (क्रूर)
- तामस ग्रह
- पृथ्वी पुत्र
- छोटा पाप ग्रह (शनि के साथ)
मंगल के प्रकार:
- शुभ मंगल: योग कारक, राजयोग देने वाला
- पाप मंगल: क्रोध, दुर्घटना, अशुभ फल देने वाला
- मारक मंगल: मारक स्थान में होकर जीवन को नुकसान पहुंचाने वाला
मंगल का शरीर पर प्रभाव
मंगल शरीर में अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। यह शरीर की ऊर्जा, साहस, रक्त और पेशियों का कारक है।
प्रमुख अंग:
- रक्त (खून)
- मांसपेशियां
- अस्थि मज्जा
- लाल रक्त कणिकाएं
- सिर (अग्र भाग)
- पित्ताशय
- गुर्दे
- जननांग
- माथा
- नाक
कमजोर मंगल के शारीरिक लक्षण:
- रक्त संबंधी रोग
- एनीमिया (खून की कमी)
- पीलिया
- बुखार (विशेषकर तेज बुखार)
- फोड़े-फुंसी, चर्म रोग
- दुर्घटना, चोट
- मांसपेशियों में दर्द
- क्रोध, आवेश
- उच्च रक्तचाप
- पेट में अल्सर
- नाक से खून आना
💡 निधि जी का विशेष टिप: यदि आपको बार-बार चोट लगती है, क्रोध जल्दी आता है, या खून की समस्या रहती है — तो मंगल की कुंडली अवश्य जांचें। कभी-कभी मंगल की अशुभ स्थिति दुर्घटनाओं को भी आमंत्रित करती है।
कुंडली में मंगल की स्थिति का महत्व
मंगल कुंडली में 12 भावों में अलग-अलग प्रभाव देता है:
| भाव | प्रभाव |
|---|---|
| 1st भाव (लग्न) | साहस, ऊर्जा, आवेश, अहंकार |
| 2nd भाव | कुटुम्ब, धन, वाणी (कठोर) |
| 3rd भाव | पराक्रम, साहस, भाई-बहन (शुभ) |
| 4th भाव | भूमि, माता, वाहन, गृह |
| 5th भाव | संतान, बुद्धि, पराक्रम |
| 6th भाव | शत्रु नाश, रोग (शुभ यहाँ) |
| 7th भाव | विवाह, साझेदारी (मांगलिक) |
| 8th भाव | आयु, रहस्य, अचानक घटना |
| 9th भाव | भाग्य, पराक्रम, धर्म |
| 10th भाव | कर्म, पद, सत्ता |
| 11th भाव | आय, लाभ, इच्छापूर्ति |
| 12th भाव | व्यय, विदेश |
कुंडली में मंगल की विशेष स्थितियां:
- मंगल-शुक्र युति (शुक्र-मंगल): प्रेम, कला, लेकिन कभी-कभी विवाद
- मंगल-शनि युति: साहस, कर्म, अनुशासन
- मंगल-सूर्य युति: पराक्रम, सत्ता
- मंगल-बुध युति: बुद्धि, वाणी चातुर्य
- मंगल-गुरु युति: धर्म, साहस
- मंगल-राहु युति: अचानक लाभ/हानि
- मंगल-केतु युति: आध्यात्मिक साहस
- मंगल 1, 2, 4, 7, 8, 12 भाव में: मांगलिक दोष
अनुकूल और प्रतिकूल राशियां
मंगल की मित्र राशियां:
- मेष (स्वराशि)
- वृश्चिक (स्वराशि)
- सूर्य की राशियां (सिंह)
- गुरु की राशियां (धनु, मीन) - मित्र
मंगल की शत्रु राशियां:
- कर्क (नीच राशि)
- मिथुन (शत्रु)
- तुला (शत्रु)
- कन्या (शत्रु)
- कुंभ (शत्रु)
मंगल की सम राशि:
- मकर (उच्च राशि)
- धनु, मीन (आंशिक)
नक्षत्र:
- मेष, वृश्चिक: मंगल के स्वामित्व वाले
- मृगशिरा, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, धनिष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, पूर्वा भाद्रपद
मंगल का कारकत्व
मंगल ज्योतिष में अनेक चीजों का कारक है:
प्रमुख कारकत्व:
- साहस और पराक्रम — हिम्मत, वीरता
- भाई-बहन — भाई का सुख, 3rd भाव
- भूमि और संपत्ति — जमीन, मकान
- ऊर्जा — शारीरिक और मानसिक ऊर्जा
- क्रोध — गुस्सा, आवेश
- रक्त — खून, रक्त संचार
- सेना — सैन्य बल
- दुर्घटना — चोट, एक्सीडेंट
- सर्जन, इंजीनियर — तकनीकी कार्य
- जननांग — प्रजनन अंग
- मांगलिक — विवाह में मांगलिक दोष
- लाल रंग, केसरिया रंग — शुभ रंग
मंगल से जुड़े पेशे:
- सैनिक, सेना अधिकारी
- पुलिस अधिकारी
- सर्जन, डॉक्टर
- इंजीनियर (विशेषकर मैकेनिकल, सिविल)
- रियल एस्टेट
- खनन उद्योग
- धातु उद्योग
- खेल, एथलेटिक्स
- किसान
- बिजली मिस्त्री
- लोहार, कारीगर
- आग से जुड़े कार्य
मंगल की दशा और गोचर का प्रभाव
मंगल की महादशा (7 वर्ष):
मंगल की दशा 7 वर्ष की होती है। यह जातक को साहस, पराक्रम, ऊर्जा, भूमि, संपत्ति और क्रोध — दोनों दे सकती है।
मंगल दशा के शुभ फल:
- साहस और पराक्रम में वृद्धि
- भूमि, संपत्ति का लाभ
- भाई-बहनों से सहयोग
- सेना, पुलिस में सफलता
- राजनीतिक सफलता
- तकनीकी कार्यों में सफलता
- शत्रु पर विजय
- नेतृत्व की क्षमता
मंगल दशा के अशुभ फल:
- क्रोध और आवेश
- दुर्घटना, चोट
- रक्त संबंधी रोग
- भूमि, संपत्ति का विवाद
- भाई-बहनों से अनबन
- मांगलिक दोष
- अग्नि से हानि
- वैवाहिक कलह
मंगल की अंतर्दशा:
- मंगल-मंगल: 7 माह
- मंगल-चंद्र: 7 माह
- मंगल-सूर्य: 6 माह
- मंगल-बुध: 6 माह
- मंगल-गुरु: 5 माह
- मंगल-शुक्र: 7 माह
- मंगल-शनि: 5 माह
- मंगल-राहु: 6 माह
- मंगल-केतु: 7 माह
मंगल का गोचर:
मंगल हर राशि में लगभग 45 दिन रहता है। मकर राशि में मंगल अपनी उच्च राशि में होता है। मंगल का गोचर 3, 6, 10, 11 भावों में शुभ और 1, 2, 4, 5, 7, 8, 9, 12 भावों में अशुभ माना जाता है।
केस स्टडी: 2025 में एक युवती की शादी में बाधा आ रही थी। लड़के वाले कुंडली मिलान के बाद मना कर रहे थे क्योंकि लड़की की कुंडली में मंगल 7वें भाव में था — मांगलिक दोष। मैंने कुंडली में मंगल की सटीक स्थिति देखी — मंगल कन्या राशि में शनि के साथ था, जो कुछ हद तक दोष को कम करता था। मैंने मंगल शांति के उपाय, हनुमान पूजा, मंगलवार व्रत, मूंगा धारण करने की सलाह दी। 3 महीने में शादी तय हो गई। मांगलिक दोष का उपाय संभव है।
कमजोर और बलवान मंगल की पहचान
बलवान मंगल के संकेत:
- मेष, वृश्चिक, मकर राशि में
- 3, 6, 10, 11 भाव में
- सूर्य, शनि, गुरु से दृष्टि/युति
- मंगलवार को जन्म
- चित्रा, विशाखा, धनिष्ठा, ज्येष्ठा नक्षत्र में
- मूंगा रत्न धारण करने से बलवान
कमजोर मंगल के संकेत:
- कर्क, तुला राशि में (नीच)
- 1, 2, 4, 5, 7, 8, 9, 12 भाव में (विशेषकर 7वां - मांगलिक)
- शुक्र, चंद्र, बुध से युति
- बुध से अस्त
- राहु, केतु से पीड़ित
कमजोर मंगल के लक्षण:
- क्रोध, आवेश
- दुर्घटना, चोट
- रक्त संबंधी रोग
- भूमि विवाद
- भाई-बहनों से अनबन
- मांसपेशियों में कमजोरी
- नौकरी में अस्थिरता
- अग्नि भय
- असफलता, हताशा
मंगल मजबूत करने के 11 शक्तिशाली उपाय
1. मंगलवार का व्रत
मंगलवार को व्रत रखना मंगल को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावी उपाय है। व्रत के दिन लाल वस्त्र धारण करें, हनुमान जी की पूजा करें।
2. हनुमान जी की पूजा
मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की विशेष पूजा करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमान मंदिर जाकर सिंदूर चढ़ाएं।
3. मंगल मंत्र का जाप
रोजाना 108 बार "ॐ भौमाय नमः" या "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः" का जाप करें। मंत्र जाप मंगलवार को विशेष फलदायी है।
4. मूंगा रत्न धारण
शुद्ध मूंगा (Red Coral) सोने या तांबे की अंगूठी में मंगलवार को सुबह 8-9 बजे धारण करें। रत्न कम से कम 3-5 रत्ती का हो।
5. तांबे का बर्तन
घर में तांबे का बर्तन रखें। तांबे के बर्तन में पानी पीने, तांबे की अंगूठी पहनने से मंगल तत्व बलवान होता है।
6. हनुमान मंदिर जाना
मंगलवार को हनुमान मंदिर जाएँ। "ॐ हनुमते नमः" मंत्र का जाप करें। हनुमान जी को सिंदूर, चमेली के फूल, लड्डू चढ़ाएं।
7. कार्तिकेय भगवान की पूजा
मंगलवार को भगवान कार्तिकेय (मंगल के देवता) की पूजा करें। "ॐ स्कंदाय नमः" मंत्र का जाप करें।
8. लाल रंग का प्रयोग
रोजमर्रा के जीवन में लाल, केसरिया, नारंगी रंग अधिक प्रयोग करें। बिस्तर, वस्त्र, मोबाइल कवर सब में लाल रंग रखें।
9. पराक्रम के कार्य
मंगल पराक्रम का कारक है। शारीरिक श्रम, व्यायाम, खेलकूद, योग करने से मंगल बलवान होता है। निडर होकर कठिन कार्य करें।
10. दान
मंगलवार को गेहूं, लाल वस्त्र, तांबा, लाल चुनरी, हल्दी, मसूर दाल का दान करें। गरीबों को भोजन कराएं।
11. मंगल हवन
मंगलवार को "ॐ भौमाय स्वाहा" मंत्र से हवन करें। हवन में गेहूं, मसूर दाल, लाल चंदन का प्रयोग करें। 11 मंगलवार तक हवन करें।
💡 निधि जी का विशेष टिप: हनुमान चालीसा का पाठ मंगल और शनि दोनों के लिए लाभकारी है। मंगलवार और शनिवार दोनों दिन हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें। यह मंगल के साथ-साथ आपके आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है।
मंगल मंत्र और पूजा विधि
मंगल के प्रमुख मंत्र:
मूल मंत्र:
ॐ भौमाय नमः
बीज मंत्र:
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
विशेष मंत्र:
ॐ भूमिपुत्राय विद्महे
लोहितांगाय धीमहि
तन्नो भौमः प्रचोदयात्
मंगलवार विशेष मंत्र:
ॐ भौम देवाय नमः, मंगलवार प्रभो नमः
साहसं शक्तिं ददामि, हनुमान् पूजयाम्यहम्
मंगल पूजा विधि:
- समय: मंगलवार की सुबह, सूर्योदय के बाद
- स्थान: पूजा स्थल
- वस्त्र: लाल या केसरिया
-
सामग्री:
- हनुमान जी की मूर्ति
- लाल पुष्प
- सिंदूर
- चमेली का तेल
- लड्डू (नैवेद्य)
- अक्षत
-
विधि:
- स्नान करके शुद्ध हों
- लाल वस्त्र धारण करें
- हनुमान जी की मूर्ति स्थापित करें
- सिंदूर, चमेली के फूल अर्पित करें
- "ॐ भौमाय नमः" मंत्र से पूजा करें
- हनुमान चालीसा का पाठ करें
- लड्डू का नैवेद्य लगाएं
- प्रसाद बांटें
मंगल रत्न और धातु
मूंगा (Red Coral):
- रंग: लाल, नारंगी-लाल, गहरा लाल
- धातु: सोना (मुख्य), तांबा (वैकल्पिक)
- अंगूली: मध्यमा (बीच की उंगली)
- समय: मंगलवार, सुबह 8-9 बजे
- शुद्धता: प्राकृतिक, इटली या जापान का मूंगा
- वजन: कम से कम 3 रत्ती
-
फायदे:
- साहस और पराक्रम बढ़ता है
- भूमि, संपत्ति का लाभ
- भाई-बहनों से सहयोग
- रक्त संबंधी रोगों में राहत
- क्रोध पर नियंत्रण
- मांगलिक दोष में कमी
- सेना, पुलिस में सफलता
- तकनीकी कार्यों में सफलता
मंगल की धातु:
तांबा (Copper) — तांबे के गिलास में पानी पीने, तांबे की अंगूठी पहनने, तांबे के बर्तन में भोजन करने से मंगल तत्व बलवान होता है। लोहा (Iron) भी मंगल की धातु है।
मंगल के रंग:
- मुख्य: लाल, केसरिया
- वस्त्र: लाल, केसरिया, नारंगी
- फूल: लाल गुलाब, गुड़हल, सूरजमुखी
- अगरबत्ती: केसर, चंदन, कस्तूरी
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
मंगल कमजोर होने के क्या लक्षण हैं?
क्रोध, दुर्घटना, रक्त विकार, भूमि विवाद, भाई-बहनों से अनबन, मांसपेशियों में कमजोरी, नौकरी में अस्थिरता।
क्या मूंगा रत्न सभी को धारण करना चाहिए?
नहीं। मूंगा कमजोर मंगल वाले जातकों को ही धारण करना चाहिए। पहले कुंडली दिखाएं।
मांगलिक दोष का उपाय क्या है?
हनुमान जी की पूजा, मंगलवार व्रत, मूंगा रत्न, मंगल मंत्र जाप, कुंडली मिलान में मंगल की स्थिति जांचना।
मंगलवार व्रत कैसे रखें?
मंगलवार की सुबह हनुमान मंदिर जाएँ, लाल वस्त्र धारण करें, हनुमान चालीसा का पाठ करें, एक बार भोजन करें (फलाहार या खिचड़ी)।
मंगल दशा अशुभ हो तो क्या करें?
मूंगा धारण करें, मंगलवार व्रत रखें, हनुमान पूजा करें, पराक्रम के कार्य करें।
क्या महिलाएं मूंगा पहन सकती हैं?
हां, महिलाएं मूंगा पहन सकती हैं। कुंडली के अनुसार निर्णय लें।
मंगल किस दिशा में रहता है?
दक्षिण दिशा में। सोते समय सिर दक्षिण दिशा में रखना शुभ होता है।
मंगल के अच्छे दिन कौन से हैं?
मंगलवार, चैत्र मास, हनुमान जयंती के दिन विशेष शुभ होते हैं।
मंगल अस्त कब होता है?
सूर्य के 28° के भीतर मंगल हो तो अस्त माना जाता है। अस्त मंगल कमजोर फल देता है।
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निष्कर्ष — मेरी अंतिम सलाह
प्रिय पाठकों, मंगल ग्रह आपकी कुंडली में साहस, पराक्रम, भूमि, संपत्ति, भाई-बहनों और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। यदि मंगल बलवान है तो जीवन में साहस, ऊर्जा, सफलता और पराक्रम मिलता है। यदि कमजोर है तो उपाय करके इसे बलवान बनाया जा सकता है।
मेरी 15 वर्षों के अनुभव की सीख:
- हनुमान पूजा — मंगल को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावी उपाय
- मंगलवार व्रत — 11 मंगलवार तक अवश्य करें
- मूंगा रत्न — कुंडली दिखाकर ही धारण करें
- पराक्रम — शारीरिक श्रम और व्यायाम करें
- लाल रंग — रोजमर्रा में प्रयोग करें
- तांबे का बर्तन — घर में अवश्य रखें
- क्रोध पर नियंत्रण — मंगल का शत्रु क्रोध है
शुभकामनाओं सहित,
गुरुमूर्ति निधि श्रीमाली प्रमुख ज्योतिषी, पंडित एनएम श्रीमाली
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