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Importance of Sharad Purnimaशरद पूर्णिमा 2026: चंद्रमा की 16 कलाओं का रहस्य, मां लक्ष्मी की कृपा, पौराणिक कथाएं और धन-समृद्धि के विशेष उपाय

22 October 2026 11 min read|By Nidhi Shrimali

Importance of Sharad Purnima शरद पूर्णिमा 2026: चंद्रमा की 16 कलाओं का रहस्य, मां लक्ष्मी की कृपा, पौराणिक कथाएं और धन-समृद्धि के विशेष उपाय

गुरु माँ निधि श्रीमाली जी के आध्यात्मिक मार्गदर्शन एवं ज्योतिषीय दृष्टिकोण से जानिए शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व, पूजा विधि, कोजागरी व्रत कथा, चंद्रमा से जुड़े ज्योतिषीय रहस्य और जीवन में सुख-समृद्धि के पारंपरिक उपाय।

सनातन धर्म में प्रत्येक पूर्णिमा का अपना विशेष महत्व होता है, लेकिन आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। इसे शरद पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा, रास पूर्णिमा और शरद पूनम के नाम से जाना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। इस रात चंद्रमा की शीतल किरणों को अमृत के समान माना गया है। यह पर्व केवल चंद्र दर्शन का अवसर नहीं, बल्कि माता महालक्ष्मी की आराधना, भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य रासलीला, मन की शुद्धि और आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने का भी विशेष अवसर है।

गुरु माँ निधि श्रीमाली जी की आध्यात्मिक शिक्षाओं के अनुरूप, किसी भी पूजा का वास्तविक महत्व केवल बाहरी विधि-विधान में नहीं, बल्कि श्रद्धा, पवित्र भावनाओं और सकारात्मक संकल्प में भी निहित है।

शरद पूर्णिमा 2026 कब है? जानिए सही तिथि

25

अक्टूबर

रविवार, 2026

शरद पूर्णिमा एवं कोजागरी पूजा

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 25 अक्टूबर, प्रातः 11:55 बजे

पूर्णिमा तिथि समाप्त: 26 अक्टूबर, प्रातः 9:41 बजे

वर्ष 2026 में शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर, रविवार को मनाई जाएगी। इसी दिन रात्रि में चंद्र दर्शन, माता लक्ष्मी की पूजा और खीर अर्पण का विशेष महत्व है।

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की 16 कलाओं का क्या महत्व है?

ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावनाओं, मानसिक शांति, मातृसुख और संवेदनशीलता का कारक माना जाता है। चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति के मनोभावों और मानसिक प्रवृत्तियों के ज्योतिषीय अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पौराणिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात्रि चंद्रमा अपनी समस्त सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर अपनी दिव्य आभा बिखेरता है। इन कलाओं को पूर्णता, सौंदर्य, शांति और चेतना का प्रतीक माना गया है।

गुरु माँ निधि श्रीमाली जी के मार्गदर्शन की भावना के अनुसार, शरद पूर्णिमा हमें यह संदेश देती है कि जिस प्रकार चंद्रमा अंधकार में भी प्रकाश फैलाता है, उसी प्रकार मनुष्य को अपने जीवन की कठिन परिस्थितियों में धैर्य, सकारात्मक सोच और ईश्वर के प्रति विश्वास बनाए रखना चाहिए।

इस दिन चंद्रमा के दर्शन करना, चंद्र मंत्र का जप करना और शांत मन से ध्यान करना आध्यात्मिक रूप से लाभकारी माना जाता है।

शरद पूर्णिमा की रात क्यों मानी जाती है अमृत वर्षा की रात?

शरद पूर्णिमा से जुड़ी सबसे प्रचलित धार्मिक मान्यता यह है कि इस रात्रि में चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है।

इसी विश्वास के कारण अनेक परिवारों में दूध और चावल से बनी खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा है। मान्यता है कि चंद्रमा की शीतलता का प्रभाव खीर में समाहित होता है और इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करना शुभ माना जाता है।

गुरु माँ के आध्यात्मिक मार्गदर्शन की भावना के अनुरूप, इस परंपरा का संदेश मन की शांति, प्रकृति के प्रति सम्मान और ईश्वर को अर्पित भोजन को प्रसाद के रूप में स्वीकार करना है।

हालांकि अमृत वर्षा और रोगों के उपचार संबंधी बातें धार्मिक आस्थाएं हैं, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित चिकित्सा परिणाम नहीं। खीर को पूरी रात खुले में रखने पर उसके खराब होने का खतरा हो सकता है, इसलिए स्वच्छता, सुरक्षित तापमान और खाद्य सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

शरद पूर्णिमा की पौराणिक कथाएं

1. साहूकार की दो बेटियों की व्रत कथा

प्राचीन लोककथा के अनुसार, किसी नगर में एक साहूकार रहता था। उसकी दो पुत्रियां थीं। दोनों ही पूर्णिमा का व्रत रखती थीं, लेकिन उनके व्रत करने के तरीके अलग-अलग थे।

बड़ी पुत्री पूरी श्रद्धा, नियम और विधि-विधान से व्रत करती थी, जबकि छोटी पुत्री व्रत के नियमों का पूरी तरह पालन नहीं करती थी।

विवाह के पश्चात बड़ी पुत्री का पारिवारिक जीवन सुखपूर्वक व्यतीत होने लगा। दूसरी ओर छोटी पुत्री की संतानें जन्म के कुछ समय बाद ही मृत्यु को प्राप्त हो जाती थीं।

कथा के अनुसार, एक बार छोटी पुत्री के यहां एक पुत्र का जन्म हुआ, लेकिन वह जीवित नहीं रहा। बड़ी बहन जब उसके घर आई और उसका स्पर्श बालक को हुआ, तो व्रत के पुण्य प्रभाव से बालक जीवित हो उठा।

इस घटना के बाद छोटी बहन ने पूर्णिमा व्रत की महिमा समझी और पूर्ण श्रद्धा से शरद पूर्णिमा का व्रत करना आरंभ किया।

कथा का आध्यात्मिक संदेश: यह कथा श्रद्धा, अनुशासन और विधिपूर्वक पूजा के महत्व को दर्शाती है। इसे धार्मिक लोककथा के रूप में समझना चाहिए, न कि जीवन-मृत्यु संबंधी घटनाओं का चिकित्सकीय स्पष्टीकरण।

2. भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य महारास लीला

शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पवित्र रात भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ दिव्य महारास रचाया था।

कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी योगमाया से ऐसे अनेक रूप धारण किए कि प्रत्येक गोपी को अनुभव हुआ कि भगवान उसके साथ उपस्थित हैं।

यह महारास सामान्य नृत्य नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के दिव्य प्रेम, समर्पण एवं भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि ईश्वर की सच्ची प्राप्ति अहंकार से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और पूर्ण समर्पण से होती है।

3. माता लक्ष्मी का पृथ्वी पर आगमन और कोजागरी व्रत

शरद पूर्णिमा की रात्रि को कोजागरी रात्रि भी कहा जाता है।

'कोजागरी' शब्द को संस्कृत के 'को जागर्ति?' अर्थात 'कौन जाग रहा है?' से जोड़ा जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि इस रात माता महालक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और उन भक्तों पर विशेष कृपा करती हैं जो श्रद्धापूर्वक जागरण, पूजा-पाठ, मंत्र जप और भजन-कीर्तन करते हैं।

इसी कारण अनेक परिवारों में इस रात्रि माता लक्ष्मी की विशेष आराधना की जाती है।

यह पर्व हमें याद दिलाता है कि वास्तविक समृद्धि केवल धन संचय में नहीं, बल्कि सदाचार, परिश्रम, संतोष, परिवार की सुख-शांति और आध्यात्मिक जागरूकता में भी है।

शरद पूर्णिमा पर धन प्राप्ति और कर्ज से मुक्ति के पारंपरिक उपाय

गुरु माँ निधि श्रीमाली जी के आध्यात्मिक मार्गदर्शन की भावना के अनुसार, धार्मिक उपायों को श्रद्धा और सकारात्मक संकल्प के साथ करना चाहिए। जीवन में आर्थिक स्थिरता के लिए परिश्रम, उचित निर्णय और धन का सही प्रबंधन भी उतना ही आवश्यक है।

1. पीली कौड़ियों से माता लक्ष्मी की आराधना

शरद पूर्णिमा की रात्रि में पूजा स्थान को साफ करके माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

घी का दीपक प्रज्वलित करें और माता लक्ष्मी को पीली कौड़ियां अर्पित करें। इसके बाद लक्ष्मी मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें।

अगले दिन इन कौड़ियों को लाल वस्त्र में बांधकर अपने धन रखने के स्थान या तिजोरी में रखें।

धार्मिक मान्यताओं में इस उपाय को धन-संपत्ति के संरक्षण और समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है।

2. लौंग और दीपक का पारंपरिक उपाय

आर्थिक परेशानियों और कर्ज से मुक्ति की प्रार्थना के लिए शरद पूर्णिमा की रात्रि माता लक्ष्मी के समक्ष घी का दीपक जलाएं।

पूजा में लौंग अर्पित करें और माता लक्ष्मी से आर्थिक स्थिरता, विवेक तथा कठिनाइयों को दूर करने की प्रार्थना करें।

पूजा के पश्चात दो लौंग लाल कपड़े में बांधकर पूजा स्थान या तिजोरी में रख सकते हैं।

यह एक आस्था-आधारित परंपरा है। कर्ज से वास्तविक मुक्ति के लिए आय-व्यय का संतुलन और व्यवस्थित ऋण भुगतान जरूरी है।

3. श्री सूक्त और लक्ष्मी मंत्र का पाठ

शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त करने की भावना से श्री सूक्त, लक्ष्मी अष्टोत्तरशतनाम या लक्ष्मी मंत्र का पाठ किया जाता है।

माता लक्ष्मी का मंत्र:

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य और परंपरा के अनुसार 11, 21 या 108 बार मंत्र का जाप कर सकते हैं।

मान्यता है कि माता लक्ष्मी की नियमित उपासना से व्यक्ति में सकारात्मकता, संतोष और आध्यात्मिक अनुशासन बढ़ता है।

4. पीपल के वृक्ष की पूजा

शरद पूर्णिमा के दिन प्रातः स्नान के पश्चात पीपल के वृक्ष को स्वच्छ जल अर्पित करने की परंपरा है।

कुछ स्थानीय परंपराओं में जल के साथ थोड़ी मिठास अर्पित करने का भी उल्लेख मिलता है। वृक्ष की देखभाल का ध्यान रखते हुए केवल स्वच्छ जल चढ़ाना बेहतर है।

इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करें तथा परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

5. मुख्य द्वार पर दीपक प्रज्वलित करना

शरद पूर्णिमा की रात्रि में घर के मंदिर और मुख्य द्वार पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है।

दीपक का प्रकाश अज्ञान, भय और नकारात्मक विचारों को दूर कर ज्ञान, आशा तथा सकारात्मकता की ओर बढ़ने का प्रतीक है।

दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखें और बिना निगरानी के जलता हुआ न छोड़ें।

शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने और अर्पित करने की परंपरा

शरद पूर्णिमा की विशेष पहचान चांदनी में खीर रखने की परंपरा है।

इस दिन गाय के दूध, चावल, मिश्री या चीनी तथा इलायची से खीर तैयार की जाती है। पूजा के समय इसे भगवान श्रीकृष्ण और माता लक्ष्मी को अर्पित करने की परंपरा भी है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात्रि चंद्रमा की किरणें अमृत के समान मानी जाती हैं और खीर को चंद्र प्रकाश में रखना शुभ समझा जाता है।

खीर को चंद्रमा के दर्शन कराकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जा सकता है, लेकिन दूध से बनी खीर को लंबे समय तक सामान्य तापमान पर रखना सुरक्षित नहीं है। इसे सुरक्षित रूप से ढककर, ठंडा रखकर और खाद्य सुरक्षा का ध्यान रखते हुए ही सेवन करें।

शरद पूर्णिमा और ज्योतिष शास्त्र का गहरा संबंध

वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है। जन्म कुंडली में चंद्रमा की राशि, भाव, नक्षत्र तथा अन्य ग्रहों से संबंध का अध्ययन व्यक्ति के मन, भावनात्मक प्रवृत्तियों और जीवन के विभिन्न पक्षों को समझने के लिए किया जाता है।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से शरद पूर्णिमा चंद्र उपासना और मानसिक एकाग्रता का विशेष अवसर है।

गुरु माँ निधि श्रीमाली जी के ज्योतिषीय मार्गदर्शन की भावना के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति की जन्म कुंडली अलग होती है। इसलिए एक ही उपाय हर व्यक्ति के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं माना जाना चाहिए।

यदि किसी व्यक्ति को जीवन में बार-बार बाधाएं, मानसिक अशांति, पारिवारिक तनाव, विवाह में विलंब, नौकरी या व्यापार में परेशानियां महसूस होती हैं, तो पारंपरिक ज्योतिष में जन्म कुंडली के ग्रहों, भावों, दशाओं और योगों का विश्लेषण करके मार्गदर्शन देने की पद्धति प्रचलित है।

इसका उद्देश्य व्यक्ति को उसकी परिस्थितियों के प्रति जागरूक करना और जीवन के निर्णयों में विचारपूर्ण दृष्टिकोण प्रदान करना है।

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की शांति के लिए क्या करें?

• भगवान शिव का जलाभिषेक करें और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें।

• श्रद्धापूर्वक चंद्र दर्शन करें और मानसिक शांति की प्रार्थना करें।

• चंद्र मंत्र 'ॐ सोम सोमाय नमः' का जाप करें।

• जरूरतमंद व्यक्तियों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या भोजन दान करें।

• परिवार के साथ भजन, ध्यान और धार्मिक चिंतन में समय बिताएं।

गुरु माँ के आध्यात्मिक संदेश की भावना यही है कि पूजा का उद्देश्य केवल किसी इच्छा की पूर्ति नहीं, बल्कि व्यक्ति के विचारों, व्यवहार और जीवन में सात्त्विकता का विकास भी होना चाहिए।

जन्म कुंडली बनवाना और कुंडली विश्लेषण क्यों महत्वपूर्ण है?

वैदिक ज्योतिष में जन्म कुंडली को व्यक्ति के जन्म के समय ग्रहों और राशियों की स्थिति का ज्योतिषीय मानचित्र माना जाता है।

जन्म कुंडली बनाने के लिए तीन मुख्य जानकारियां आवश्यक होती हैं: जन्म तारीख, जन्म का सही समय और जन्म स्थान।

इन जानकारियों के आधार पर लग्न कुंडली, चंद्र राशि, नक्षत्र, ग्रहों की स्थिति और अन्य ज्योतिषीय गणनाओं का अध्ययन किया जाता है।

कुंडली विश्लेषण में किन विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं?

1. विवाह एवं वैवाहिक जीवन: विवाह से जुड़े ज्योतिषीय योग, विवाह में विलंब और कुंडली मिलान।

2. करियर एवं नौकरी: दशम भाव, ग्रह दशाओं और करियर संबंधी ज्योतिषीय संकेतों का अध्ययन।

3. व्यापार एवं आर्थिक स्थिति: धन भाव, लाभ भाव और व्यापार से संबंधित ग्रहों का विश्लेषण।

4. ग्रह दोष एवं ज्योतिषीय उपाय: कुंडली में परंपरागत रूप से माने जाने वाले पितृ दोष, मंगल दोष, कालसर्प योग तथा अन्य ग्रह स्थितियों का अध्ययन।

5. पारिवारिक जीवन एवं मानसिक शांति: चंद्रमा और संबंधित ग्रहों की स्थिति का पारंपरिक ज्योतिषीय आकलन।

जन्म कुंडली का विश्लेषण एक पारंपरिक ज्योतिषीय मार्गदर्शन पद्धति है, जो किसी घटना, बीमारी या आर्थिक सफलता की निश्चित भविष्यवाणी नहीं कर सकती।

गुरु माँ निधि श्रीमाली जी के मार्गदर्शन में कुंडली निर्माण एवं कुंडली विश्लेषण

यदि आप अपनी जन्म कुंडली बनवाना चाहते हैं या पहले से बनी हुई कुंडली का विस्तृत विश्लेषण करवाना चाहते हैं, तो गुरु माँ निधि श्रीमाली जी के संस्थान से संपर्क कर सकते हैं।

ज्योतिषीय परामर्श के माध्यम से आप अपनी जन्म कुंडली के ग्रहों, दशाओं, योगों और परंपरागत उपायों के विषय में मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

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निष्कर्ष: शरद पूर्णिमा देती है भक्ति, शांति और समृद्धि का संदेश

शरद पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में भक्ति, आत्मचिंतन, दान, श्रद्धा और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है।

इस दिन माता लक्ष्मी की आराधना हमें समृद्धि के साथ सदाचार का महत्व समझाती है। भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला प्रेम और समर्पण का संदेश देती है, जबकि चंद्रमा की शीतलता हमें मन की स्थिरता एवं संतुलन की प्रेरणा देती है।

गुरु माँ निधि श्रीमाली जी के आध्यात्मिक मार्गदर्शन की भावना के अनुसार, जब व्यक्ति श्रद्धा के साथ कर्म, अनुशासन, परिश्रम और सकारात्मक सोच को अपनाता है, तभी जीवन में वास्तविक सुख और संतुष्टि का मार्ग प्रशस्त होता है।

इस शरद पूर्णिमा पर भगवान श्रीकृष्ण, माता महालक्ष्मी और चंद्रदेव से प्रार्थना करें कि सभी के जीवन में सुख, शांति, सद्बुद्धि और समृद्धि बनी रहे।

आप सभी को शरद पूर्णिमा 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं।

जय माता लक्ष्मी! जय श्रीकृष्ण!

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Written by

Nidhi Shrimali

Vedic Astrologer

Nidhi Shrimali is a Vedic astrologer with 18+ years of experience specializing in Kundali Vishleshan, Kundli Milan, Vastu Shastra, and Numerology. 1,425+ Google reviews, 4.8 rating. Based in Jodhpur, Rajasthan.

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