पद्मिनी एकादशी व्रत विधि पद्मिनी एकादशी 2026: तिथि, व्रत विधि, कथा
पद्मिनी एकादशी व्रत विधि

Published on: May 6, 2026

🕉️ पद्मिनी एकादशी 2026 (26 मई, मंगलवार)
दुर्लभ व्रत, दिव्य कृपा और जीवन परिवर्तन का पावन अवसर
गुरु माँ निधि श्रीमाली जी के ज्ञान और अनुभव से

🌸 प्रस्तावना पद्मिनी एकादशी व्रत विधि
सनातन धर्म में एकादशी व्रतों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन उनमें भी पद्मिनी एकादशी को विशेष और दुर्लभ माना गया है। यह एकादशी केवल अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में ही आती है, इसलिए इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

वर्ष 2026 में पद्मिनी एकादशी 26 मई, मंगलवार को मनाई जाएगी।
गुरु माँ निधि श्रीमाली जी के अनुसार, यह व्रत जीवन में रुके हुए कार्यों को गति देने, पापों से मुक्ति दिलाने और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम है।

🌼 पद्मिनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

गुरु माँ निधि श्रीमाली जी बताती हैं कि “पद्मिनी” शब्द का अर्थ है कमल के समान पवित्र और दिव्य।
यह व्रत आत्मा की शुद्धि, मन की एकाग्रता और भगवान विष्णु के प्रति भक्ति को प्रकट करता है।

इस दिन व्रत और पूजा करने से—

सभी पापों का नाश होता है
रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं
धन, सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है
मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है

गुरु माँ के अनुसार, यह एक ऐसा व्रत है जो व्यक्ति के जीवन में अदृश्य सकारात्मक परिवर्तन लाता है।

📖 पद्मिनी एकादशी की पवित्र कथा पद्मिनी एकादशी व्रत विधि

पद्मिनी एकादशी की कथा प्राचीन ग्रंथों में वर्णित है।

एक समय एक राजा थे, जिनके पास सब कुछ था लेकिन संतान सुख नहीं था। उन्होंने ऋषियों के मार्गदर्शन में अधिक मास की पद्मिनी एकादशी का व्रत किया। उनकी पत्नी ने भी पूर्ण श्रद्धा और नियम से यह व्रत किया।

उनकी भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें योग्य संतान का आशीर्वाद दिया।

गुरु माँ निधि श्रीमाली जी कहती हैं—

“पद्मिनी एकादशी हमें यह सिखाती है कि जब श्रद्धा, संयम और विश्वास एक साथ होते हैं, तो भगवान स्वयं हमारे जीवन की बाधाओं को दूर कर देते हैं।”

🪔 व्रत की विधि (पूजा विधि) पद्मिनी एकादशी व्रत विधि

गुरु माँ के अनुभव के अनुसार, पद्मिनी एकादशी व्रत को पूरी श्रद्धा और नियम के साथ करना चाहिए।

🔹 व्रत की शुरुआत:
दशमी तिथि की रात से ही सात्विक आहार लें
एकादशी के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठें
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें


🔹 पूजन सामग्री:
भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र
तुलसी दल
फल, फूल, धूप, दीप
पंचामृत, गंगाजल
पीले वस्त्र

🔹 पूजा प्रक्रिया:
भगवान विष्णु का ध्यान करें
उन्हें गंगाजल, फूल और तुलसी अर्पित करें
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें
पद्मिनी एकादशी व्रत कथा सुनें
दिन भर उपवास रखें (फलाहार या निर्जल)
रात्रि में जागरण करें और भजन-कीर्तन करें
🔹 पारण (व्रत खोलना):
द्वादशी तिथि को प्रातः ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराकर व्रत खोलें
🌟 पद्मिनी एकादशी के विशेष उपाय

गुरु माँ निधि श्रीमाली जी के अनुसार, इस दिन किए गए उपाय अत्यंत प्रभावशाली होते हैं—

भगवान विष्णु को पीले फूल और तुलसी अर्पित करें
“विष्णु सहस्रनाम” का पाठ करें
गरीबों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें
तुलसी के पौधे में दीपक जलाएं

ये उपाय जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं।

🧘 गुरु माँ का विशेष संदेश पद्मिनी एकादशी व्रत विधि

गुरु माँ कहती हैं—

“पद्मिनी एकादशी केवल व्रत नहीं, बल्कि यह आत्मसंयम और आत्मशुद्धि का मार्ग है। जब हम अपने मन और इंद्रियों को नियंत्रित करते हैं, तभी सच्चे अर्थों में ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।”

🌺 आधुनिक जीवन में महत्व

आज के समय में जहां जीवन में भागदौड़ और तनाव बढ़ रहा है, वहाँ यह व्रत हमें संतुलन और शांति प्रदान करता है।

यह मन को स्थिर करता है
आत्मविश्वास बढ़ाता है
जीवन में सकारात्मक सोच लाता है
🪔 निष्कर्ष

पद्मिनी एकादशी एक दुर्लभ और अत्यंत प्रभावशाली व्रत है, जो व्यक्ति के जीवन को भीतर से बदलने की शक्ति रखता है।
गुरु माँ निधि श्रीमाली जी के दिव्य ज्ञान और अनुभव से यह स्पष्ट होता है कि यदि हम इस व्रत को सच्चे मन और श्रद्धा से करें, तो भगवान विष्णु की विशेष कृपा से हमारे जीवन के सभी कष्ट दूर हो सकते हैं।

✨ भगवान विष्णु की कृपा आप सभी पर बनी रहे और आपका जीवन सुख, शांति और समृद्धि से भर जाए।

👉 www.panditnmshrimali.com
📞 संपर्क: +91 9352054997
📲 फॉलो करें:
YouTube | Facebook | Instagram | Twitter – @NidhiShrimali

Table of Contents

Shopping cart
Start typing to see products you are looking for.