🕉️ ज्येष्ठ मास 2026 : दुर्लभ संयोग, अधिक मास और बड़े मंगल का महापर्व
सन 2026 का ज्येष्ठ मास हिंदू धर्म में अत्यंत विशेष और दुर्लभ संयोग लेकर आया है। इस वर्ष अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के कारण ज्येष्ठ माह की अवधि सामान्य से कहीं अधिक बढ़कर लगभग 59 दिनों की हो गई है। यह मास 2 मई से प्रारंभ होकर 29 जून 2026 तक चलेगा। इस प्रकार का संयोग लगभग 19 वर्षों बाद बन रहा है, इससे पहले वर्ष 2007 में ऐसा अद्भुत योग देखने को मिला था।
हिंदू पंचांग में अधिक मास का विशेष महत्व बताया गया है। जब सूर्य और चंद्र मासों के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता होती है, तब एक अतिरिक्त मास जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इस वर्ष यह विशेष अवधि 17 मई से 15 जून तक रहेगी। धार्मिक दृष्टि से यह समय जप, तप, व्रत, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है।
🔶 बड़े मंगल का धार्मिक महत्व
ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगलवार को ‘बड़ा मंगल’ कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेता युग में इसी माह के मंगलवार को भगवान श्रीराम और भगवान हनुमान का प्रथम मिलन हुआ था। यही कारण है कि इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ राम-हनुमान की संयुक्त उपासना करने से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
इसी संदर्भ में आध्यात्मिक मार्गदर्शक गुरु माँ निधि श्रीमाली का कहना है कि ज्येष्ठ मास के बड़े मंगल केवल पूजा का अवसर नहीं, बल्कि सेवा, संयम और सकारात्मक ऊर्जा को जीवन में उतारने का श्रेष्ठ समय है। उनके अनुसार, इस अवधि में किया गया हर छोटा-सा सत्कर्म भी कई गुना फलदायी होता है।
🔶 इस वर्ष के आठ बड़े मंगल
अधिक मास के कारण इस बार ज्येष्ठ माह में कुल 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं, जो इसे और भी विशेष बनाता है:
5 मई – प्रथम मंगल
12 मई – द्वितीय मंगल
19 मई – तृतीय मंगल
26 मई – चतुर्थ मंगल
2 जून – पंचम मंगल
9 जून – छठा मंगल
16 जून – सातवां मंगल
23 जून – आठवां मंगल
सामान्यतः एक ज्येष्ठ माह में 4 या 5 मंगलवार ही आते हैं, लेकिन इस बार इनकी संख्या बढ़कर 8 हो गई है।
🔶 अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) का महत्व
अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) को भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इसे “पुरुषोत्तम मास” इसलिए कहा जाता है क्योंकि भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम और विशेष स्थान प्रदान किया।
इस मास में जप, तप, दान, व्रत, धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन और सेवा कार्य विशेष फलदायी माने गए हैं।
गुरु माँ निधि श्रीमाली के अनुसार, यह समय आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का भी है, जब व्यक्ति अपने भीतर के दोषों को दूर कर आध्यात्मिक उन्नति की ओर बढ़ सकता है।
🔶 भोगिशैल परिक्रमा : मारवाड़ का ‘मिनी महाकुंभ’
जोधपुर में इस पावन अवसर पर भोगिशैल परिक्रमा का आयोजन 25 मई से 31 मई 2026 तक किया जाएगा। यह आयोजन हिंदू सेवा मंडल के तत्वावधान में होता है और इसे मारवाड़ का ‘मिनी महाकुंभ’ कहा जाता है।
इस दौरान हजारों श्रद्धालु भोगिशैल की परिक्रमा करते हैं और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। यह आयोजन भक्ति और सामाजिक एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
🔶 भक्ति, सेवा और श्रद्धा का संगम
ज्येष्ठ मास का यह समय केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवा और दान का भी महापर्व है।
गुरु माँ निधि श्रीमाली के मार्गदर्शन में भी श्रद्धालुओं को प्रेरित किया जाता है कि वे इस पावन अवसर पर जरूरतमंदों की सहायता करें, जल सेवा करें और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करें।
बड़े मंगल के दिन:
हनुमान जी को चोला चढ़ाया जाता है
सिंदूर और तेल अर्पित किया जाता है
हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है
भंडारे और सेवा कार्य किए जाते हैं
🔶 त्योहारों पर अधिक मास का प्रभाव
अधिक मास के कारण इस वर्ष प्रमुख त्योहारों की तिथियों में लगभग 19 दिनों का अंतर आ गया है:
रक्षाबंधन – 28 अगस्त
गणेश चतुर्थी – 14 सितंबर
दशहरा – 20 अक्टूबर
दीपावली – 8 नवंबर
🔶 निष्कर्ष
ज्येष्ठ मास 2026 का यह दुर्लभ संयोग श्रद्धालुओं के लिए एक अनमोल अवसर है। अधिक मास और बड़े मंगल का यह संगम व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति, पुण्य अर्जन और सेवा कार्यों के लिए प्रेरित करता है।
गुरु माँ निधि श्रीमाली के संदेश के अनुसार, यदि इस समय को सही भावना और निष्ठा के साथ जिया जाए, तो यह जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है और व्यक्ति को शांति, संतोष और सफलता की ओर अग्रसर करता है।
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