प्रिय साधकों,
वर्ष 2026 की होली केवल रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक संकेत भी लेकर आ रही है। 3 मार्च 2026 को जब पूरा देश हर्षोल्लास से होली मना रहा होगा, उसी दिन आकाश में एक पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई देगा।
यह संयोग साधारण नहीं है। पूर्णिमा, चंद्रमा और ग्रहण — तीनों मिलकर मन, भावनाओं और सामूहिक चेतना पर गहरा प्रभाव डालते हैं। वर्षों के अध्ययन और अनुभव के आधार पर मैं आपको इस ग्रहण का सटीक अर्थ, समय, प्रभाव और उपाय बताने जा रही हूँ।
🌑 यह किस प्रकार का ग्रहण है?
3 मार्च 2026 को लगने वाला यह पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) है।
इस अवस्था में पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और अपनी छाया से चंद्रमा को पूर्ण रूप से ढक लेती है। इस कारण चंद्रमा लालिमा लिए हुए दिखाई देता है, जिसे आधुनिक भाषा में “ब्लड मून” भी कहा जाता है।
पूर्ण चंद्र ग्रहण सदैव गहरा और व्यापक प्रभाव वाला माना जाता है — विशेषकर मानसिक और भावनात्मक स्तर पर।
⏰ ग्रहण का सटीक समय (भारतीय समयानुसार)
सूतक काल प्रारंभ – प्रातः 05:15 बजे
ग्रहण स्पर्श (शुरुआत) – दोपहर 02:12 बजे
पूर्ण ग्रहण (खग्रास) – 04:28 बजे से 05:41 बजे तक
ग्रहण मोक्ष (समाप्ति) – रात्रि 07:57 बजे
भारत में यह ग्रहण ‘ग्रस्तोदय’ रूप में दिखाई देगा। अर्थात जब चंद्रमा उदित होगा, उस पर पहले से ही ग्रहण लगा होगा।
पूर्वी भारत में पूर्णता का अधिक भाग दिखाई देगा, जबकि पश्चिमी भारत में मुख्यतः अंतिम चरण दिखाई देगा।
चूँकि यह ग्रहण भारत में दृश्यमान है, इसलिए सूतक काल पूरे देश में मान्य रहेगा।
🎨 होली और ग्रहण – क्या करें, क्या न करें?
यह सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है — क्या होली खेलनी चाहिए?
मेरे अनुभव में, शास्त्र और परंपरा हमें संतुलन सिखाते हैं, भय नहीं।
✔ क्या करें?
सुबह सूतक लगने से पहले पूजा-पाठ कर लें
दोपहर से पहले हल्की-फुल्की होली खेल सकते हैं
ग्रहण समाप्ति (रात्रि 07:57) के बाद स्नान कर शुद्ध मन से गुलाल का टीका लगाएं
✖ क्या न करें?
ग्रहण काल (दोपहर 2:12 से रात 7:57 तक) रंग खेलने से बचें
भोजन ग्रहण के दौरान न करें
गर्भवती महिलाएं विशेष सावधानी रखें
नुकीली वस्तुओं का प्रयोग टालें
ग्रहण काल साधना और आत्मचिंतन का समय है, उत्सव का नहीं।
🕉️ ज्योतिषीय प्रभाव
पूर्णिमा का चंद्रमा मन का कारक होता है। जब उसी दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण लगे, तो उसका प्रभाव गहरा होता है।
यह ग्रहण विशेष रूप से मानसिक और भावनात्मक क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है:
मन में अस्थिरता
निर्णय लेने में भ्रम
मूड स्विंग
अधिक संवेदनशीलता
पुराने भावनात्मक घाव उभरना
यह ग्रहण सिंह–कन्या अक्ष पर प्रभाव डाल रहा है, जिससे आत्मसम्मान, अहं और व्यवहारिक निर्णयों में टकराव संभव है।
🔮 राशियों पर सामान्य प्रभाव
(यह सामान्य संकेत है, व्यक्तिगत कुंडली अनुसार प्रभाव भिन्न हो सकता है)
🔥 अग्नि तत्व (मेष, सिंह, धनु) – जल्दबाजी से बचें
🌍 पृथ्वी तत्व (वृषभ, कन्या, मकर) – आर्थिक निर्णय सोच-समझकर लें
🌬 वायु तत्व (मिथुन, तुला, कुंभ) – संवाद में स्पष्टता रखें
💧 जल तत्व (कर्क, वृश्चिक, मीन) – भावनात्मक संतुलन बनाए रखें
🙏 ग्रहण के समय क्या करें?
ग्रहण भय का नहीं, साधना का समय है।
“ॐ नमः शिवाय” या गायत्री मंत्र का जाप
ध्यान और प्रार्थना
सकारात्मक चिंतन
क्रोध और विवाद से दूरी
🌸 ग्रहण समाप्ति के बाद अचूक उपाय
रात्रि 07:57 बजे ग्रहण समाप्ति के पश्चात:
शुद्धिकरण स्नान करें
घर में गंगाजल का छिड़काव करें
सफेद वस्तुओं (चावल, चीनी, दूध) का दान करें
दीपक जलाकर ईश्वर का स्मरण करें
स्नान के बाद ही गुलाल का टीका लगाएं
इन उपायों से मानसिक शांति और ऊर्जा संतुलन प्राप्त होता है।
✨ मेरा आध्यात्मिक संदेश
प्रियजनों,
ग्रहण हमें डराने नहीं, जगाने आते हैं।
होली का संदेश है — नकारात्मकता को जलाना और प्रेम के रंग में रंग जाना।
चंद्र ग्रहण का संदेश है — मन को स्थिर रखना और आत्मचिंतन करना।
इस बार की होली बाहरी रंगों से अधिक, आंतरिक शुद्धि की होनी चाहिए।
रंग भी खेलें, लेकिन सजगता के साथ।
उत्सव भी मनाएं, लेकिन मर्यादा के साथ।
मन भी स्थिर रखें, और भावनाओं पर नियंत्रण भी।
आप सभी को सुरक्षित, जागरूक और मंगलमय होली की शुभकामनाएँ।
जय श्री राम 🙏
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